आसनसोल/पांडेश्वर : शनिवार को आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर और पांडेश्वर के पूर्व विधायक जितेंद्र तिवारी ने एक बार फिर से राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने पांडेश्वर विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में हुई BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) की नियुक्तियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। तिवारी ने प्रेस वार्ता कर कहा कि 103 BLO की नियुक्तियों की पूरी सूची विधायक नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती के दफ्तर में बैठकर तैयार की गई है।
उन्होंने दावा किया कि इस सूची में अधिकांश लोग स्थानीय न होकर दूसरे जिलों से लाए गए हैं। कई नियुक्त व्यक्ति स्वास्थ्यकर्मी हैं तो कई सीधे तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता। तिवारी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से खिलवाड़ करार दिया। उनके अनुसार, यह कदम चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधा प्रहार है।
तिवारी ने कहा, “एक निर्वाचित प्रतिनिधि और ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) मिलकर पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बना रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” उन्होंने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए बताया कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) को पत्र और ईमेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई है।
पूर्व विधायक ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे कानून का सहारा लेने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है और इसमें किसी भी प्रकार की हेराफेरी या पक्षपात अस्वीकार्य है। उनके अनुसार, BLO नियुक्तियों में जिस तरह का पक्षपात किया गया है, उससे जनता का चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है।
इस विवाद ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। तिवारी के आरोपों के बाद विपक्षी दलों ने भी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि BLO जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले पद पर ही राजनीतिक हस्तक्षेप होगा, तो आम मतदाता अपने अधिकारों का उपयोग करने में असहज महसूस करेगा।
वहीं, दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस खेमे की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि आरोपों की जांच होती है और इनमें सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला आगामी चुनावों पर गहरा असर डाल सकता है।
स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि BLO की नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। एक निवासी ने कहा, “हम वोट डालने जाते हैं तो उम्मीद करते हैं कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष होगी। अगर BLO जैसे पद पर ही राजनीतिक दबाव रहेगा तो निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।”
जितेंद्र तिवारी के इन आरोपों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चुनावी तैयारियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अब भी एक बड़ी चुनौती है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या जनता के विश्वास को कायम रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

















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