आसनसोल खदान में पानी घुसा, श्रमिकों में दहशत और सवाल

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आसनसोल :  मंगलवार को आसनसोल के सालनपुर क्षेत्र स्थित गौरांडी वत्स खोलामुख खदान में पानी भर जाने की घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी। खदान अधिकारियों ने दावा किया कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, किंतु उस समय खदान में काम कर रहा एक ड्राइवर पानी के दबाव में फँस गया और स्थिति भयावह हो उठी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे क्षेत्र में खदान सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गए।

अचानक पानी घुसने से अफरातफरी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार दोपहर अचानक खदान में पानी घुसने लगा। उस समय खदान के भीतर मजदूर और मशीनें काम कर रहे थे। पानी तेज़ गति से भीतर आने पर श्रमिक घबराकर बाहर की ओर भागने लगे। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि मजदूर एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं और जान बचाने के लिए भागमभाग कर रहे हैं। इस बीच पानी के दबाव से मशीन बंद हो गई और मशीन ऑपरेटर फँस गया। हालाँकि बाद में उसे बाहर निकाल लिया गया और किसी की जान नहीं गई, लेकिन घटना ने सभी को दहला दिया।

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बार-बार दोहराई जाने वाली समस्या

स्थानीय मजदूरों ने बताया कि खदानों में पानी घुसने की समस्या नई नहीं है। पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, लेकिन इस बार पानी इतनी तेज़ी से भीतर आया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती थी। श्रमिकों ने खदान प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए जाते।

बारिश और भूजल स्तर बढ़ने को जिम्मेदार माना गया

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों से आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण भूजल स्तर काफी बढ़ गया है। इसी वजह से सुरंगों के रास्ते पानी खदान में प्रवेश कर गया। उनका कहना है कि यह केवल संयोग था कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, अन्यथा यह एक बड़ी आपदा में बदल सकती थी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

अधिकारियों का दावा और श्रमिकों की आशंका

खदान अधिकारियों ने दावा किया कि घटना पर तुरंत नियंत्रण पा लिया गया और स्थिति सामान्य कर दी गई है। लेकिन स्थानीय लोग और श्रमिक अधिकारियों के इन दावों पर भरोसा नहीं कर रहे। उनका कहना है कि प्रबंधन बार-बार ‘सब ठीक है’ का राग अलापता है, जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।

सुरक्षा उपायों पर उठे सवाल

इस घटना ने खदान सुरक्षा प्रणाली की पोल खोल दी है। श्रमिकों ने सवाल उठाया कि यदि पानी को रोकने के लिए अलार्म सिस्टम लगाया गया है तो वह काम क्यों नहीं किया? खदान का ड्रेनेज सिस्टम कितना कारगर है, यह भी संदेह के घेरे में है। खदानों में काम करने वाले श्रमिकों का कहना है कि जब तक सुरक्षा उपायों को आधुनिक तकनीक से मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रहेंगी।

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मजदूरों का भय और परिवारों की चिंता

खदान में काम करने वाले मजदूर अब लगातार भयभीत हैं। उनका कहना है कि रोज़ी-रोटी की मजबूरी उन्हें खदान में उतरने पर विवश करती है, लेकिन हर दिन जान जोखिम में डालना आसान नहीं है। मजदूरों के परिवारजन भी चिंतित हैं और बार-बार सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने की माँग कर रहे हैं।

सरकार और प्रबंधन से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय संगठनों ने राज्य सरकार और ईसीएल प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप कर खदान सुरक्षा की समीक्षा करने की माँग की है। साथ ही श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएँगे।

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