
आसनसोल : रूपनारायणपुर स्थित बंद पड़े हिंदुस्तान केबल्स परिसर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुँचा। इस दौरे ने लंबे समय से जमींदोज़ पड़े इस औद्योगिक क्षेत्र में एक नए प्रोजेक्ट की आशा जगा दी है। बीएसएफ अधिकारियों ने यहाँ के भूखंड, दस्तावेज़ और उपलब्ध संसाधनों का गहन निरीक्षण किया।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा
बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट चंदन कुमार सिंह, एसएम लक्ष्मण चंद्र साहा और जूनियर इंजीनियर मुकुल मुर्शिदाबाद के बहरमपुर से सीधे हिंदुस्तान केबल्स पहुँचे। यहाँ उन्होंने यूनिट के अधिकारी आर.एन. ओझा से मुलाकात कर ज़मीन से जुड़े कागज़ात और भू-आकृति का बारीकी से जायज़ा लिया। इस निरीक्षण को स्थानीय लोग हिंदुस्तान केबल्स की ज़मीन के पुनः उपयोग की दिशा में बड़ी पहल मान रहे हैं।

बड़ा प्रोजेक्ट प्रस्तावित
सूत्रों का कहना है कि बीएसएफ इस परिसर में अपनी यूनिट स्थापित करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। प्रस्तावित यूनिट में फायरिंग रेंज, ट्रेनिंग ग्राउंड, प्रशिक्षण स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, बाज़ार और एक बड़ा टाउनशिप शामिल हो सकता है। बीएसएफ की स्पष्ट शर्त है कि यह पूरा प्रोजेक्ट चारदीवारी के भीतर विकसित किया जाएगा, ताकि सुरक्षा और अनुशासन से कोई समझौता न हो।

इसके लिए लोअर केशियर के पास अजय नदी से सटे लगभग 300 एकड़ भूखंड को उपयुक्त माना जा रहा है। यह इलाका प्रशिक्षण और आवासीय आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराता है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की भूमिका
जानकारी के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति मिलने के बाद होगा। हिंदुस्तान केबल्स अथॉरिटी पहले ही ज़मीन, तालाब और जंगल से संबंधित सभी आवश्यक विवरण दिल्ली भेज चुकी है। संभावना जताई जा रही है कि मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही कार्य प्रारंभ हो सकता है।

अन्य अर्धसैनिक बलों की भी रुचि
गौरतलब है कि इससे पहले सीआईएसएफ, सीआरपीएफ और एसएसबी भी यहाँ अपनी यूनिट स्थापित करने में रुचि जता चुके हैं। अब बीएसएफ के सक्रिय होने से यह संभावना और प्रबल हो गई है कि हिंदुस्तान केबल्स का खाली पड़ा विशाल भूखंड जल्द ही अर्धसैनिक बलों की गतिविधियों से गुलज़ार होगा। इन बलों की यूनिट बनने से यहाँ के खाली क्वार्टरों और भवनों का भी उपयोग सुनिश्चित होगा।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से न केवल सुरक्षा बलों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे। वर्षों से बंद पड़े इस औद्योगिक क्षेत्र में नई हलचल से इलाके में उत्साह है। लोग मानते हैं कि यदि यह योजना साकार होती है तो आसपास की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।














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