
आसनसोल : पश्चिम बंगाल के औद्योगिक नगर आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में वायुप्रदूषण की स्थिति दिनोंदिन भयावह होती जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदूषण के आंकड़ों में यह क्षेत्र कोलकाता जैसे महानगर को भी पीछे छोड़ चुका है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, बीते पांच वर्षों में आसनसोल में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में निरंतर वृद्धि देखी गई है, जो पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संकट को जन्म दे रही है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 में AQI जहाँ 106 था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 133 हो गया, और 2025 के शुरुआती महीनों में ही यह 157 के गंभीर स्तर तक पहुँच गया है। सोमवार को AQI 121 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक श्रेणी में आता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जामुड़िया, रणिगंज, काल्याणेश्वरी तथा देंदुआ क्षेत्रों में यह स्थिति और भी चिंताजनक है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित स्पंज आयरन इकाइयों, ईंट भट्टों तथा कोयला-आधारित छोटे उद्योगों के कारण वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है, जिससे श्वसन, हृदय व त्वचा रोगों में तीव्र वृद्धि हो रही है।
राज्य सरकार द्वारा की गई पहलों में 33% हरित आवरण सुनिश्चित करना, प्रदूषणरोधी उपकरणों की अनिवार्यता, तथा खुले में किसी भी प्रकार की दहन प्रक्रिया पर प्रतिबंध जैसे निर्देश शामिल हैं। बावजूद इसके, क्षेत्रीय प्रशासन के अनुसार कई इकाइयाँ इन निर्देशों की अनदेखी कर रही हैं। पिछले वर्ष 12 उद्योगों पर जुर्माना भी लगाया गया था, किन्तु स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
शहर की कचरा निपटान व्यवस्था भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है। रोजाना 400 टन कचरा जमा हो रहा है, किंतु उसका वैज्ञानिक पुनर्चक्रण नहीं हो पा रहा। पिछले माह कालिपहाड़ी क्षेत्र में 40 वर्षों से जमा कचरे में लगी आग ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया।

जिला अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, क्षेत्र में दमा, एलर्जी, फेफड़े और त्वचा संबंधी बीमारियों में तीव्र बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रशासन द्वारा खरीदे गए ड्रोन उपकरणों का संचालन भी तकनीकी कारणों से स्थगित है, जिससे निगरानी व्यवस्था बाधित हुई है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सुझाए गए उपायों पर आंशिक कार्यवाही हुई है, लेकिन समुचित क्रियान्वयन में ढिलाई ने आसनसोल को वायुप्रदूषण का नया केंद्र बना दिया है।














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