बर्नपुर में होर्डिंग विवाद से तृणमूल–भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष

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बर्नपुर :  त्योहारी मौसम में शहर के कई हिस्सों में बधाई संदेशों से सजे फ्लेक्स और होर्डिंग्स राजनीतिक विवाद का कारण बन गए हैं। मामला वार्ड संख्या 77 से जुड़ा है, जहाँ तृणमूल कांग्रेस के पार्षद अशोक रुद्र ने भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षद का कहना है कि उनका शुभकामना संदेश वाला पोस्टर फाड़कर उसी स्थान पर भाजपा विधायक का पोस्टर चिपका दिया गया।

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शिकायत पहुँची थाने तक

अशोक रुद्र ने इस संबंध में हीरापुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि त्रिवेणी मोड़ के समीप रेलवे ब्रिज के पास स्थित एक प्रमुख होर्डिंग पर पिछले 10–15 वर्षों से उनके दल का पोस्टर नियमित रूप से लगाया जाता रहा है। हाल ही में उन्होंने दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ पर्व की शुभकामनाओं से युक्त पोस्टर उसी स्थान पर लगवाया था। मंगलवार की सुबह अचानक उन्हें जानकारी मिली कि उनका पोस्टर फाड़ दिया गया और उसकी जगह भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल का त्योहार संबंधी पोस्टर लगाया गया है।

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पार्षद रुद्र ने आरोप लगाया कि यह घटना राजनीतिक उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले क्षेत्र में तनाव का माहौल बनाने के लिए विपक्षी दल द्वारा यह कदम उठाया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मामले में आईएसपी प्रबंधन और अन्य एजेंसियों से जानकारी लेने पर स्पष्ट किया गया कि किसी ने भी पोस्टर हटाने का कोई निर्देश नहीं दिया था। इसका अर्थ साफ है कि यह कार्य बिना अनुमति और जानबूझकर किया गया है। घटना के बाद क्षेत्रीय तृणमूल समर्थकों और कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से जिस स्थान पर उनका बैनर और पोस्टर लगते आए हैं, उसे हटाकर भाजपा का पोस्टर लगाना केवल राजनीतिक दबाव बनाने और जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। उनका आरोप है कि विपक्षी दल त्योहारों के अवसर का भी राजनीतिक लाभ उठाने से नहीं चूक रहा।

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इस घटना को लेकर भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। स्थानीय स्तर पर पार्टी नेताओं ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से परहेज़ किया है। हालांकि क्षेत्रीय राजनीति जानने वाले लोग मानते हैं कि आने वाले समय में यह विवाद और भी गहराने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के मौके पर राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर–बैनर की प्रतिस्पर्धा नई नहीं है। लेकिन जब यह प्रतिस्पर्धा पोस्टर फाड़ने या एक-दूसरे की जगह कब्जाने तक पहुँच जाए, तो इससे समाज में असंतोष और तनाव फैल सकता है। खासकर तब, जब पूरा क्षेत्र दुर्गा पूजा की तैयारियों में व्यस्त हो।

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