
आसनसोल : धेमोमैन कोलियरी क्षेत्र में इस वर्ष की दुर्गापूजा ने भव्यता और सांस्कृतिक वैभव का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। बुधवार की संध्या को आयोजित उद्घाटन समारोह में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के वित्त निदेशक मंज़ूर आलम, तकनीकी निदेशक नीलाद्रि राय, कार्मिक निदेशक गुंजन तथा परियोजना एवं योजना निदेशक श्री नायर ने संयुक्त रूप से फीता काटकर पंडाल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर सोदपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक अभिजीत गंगोपाध्याय, कोलियरी के अभिकर्ता एस. केरो, वार्ड संख्या 58 के पार्षद संजय नोनियां सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, श्रमिक संगठन प्रतिनिधि तथा स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित रहे।
समारोह की शुरुआत कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक स्वागत कर हुई। तत्पश्चात् विधिवत् पूजा-अर्चना संपन्न कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच माँ दुर्गा की आराधना कर समस्त क्षेत्रवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की।

धेमोमैन दुर्गापूजा समिति द्वारा इस वर्ष पंडाल का निर्माण दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर की तर्ज़ पर कराया गया है। नदिया ज़िले के प्रसिद्ध शिल्पियों ने अपने कौशल से पंडाल को मूर्त रूप दिया है। वहीं चंदननगर की प्रसिद्ध विद्युत सज्जा ने पंडाल की भव्यता को और भी आलोकित कर दिया। कोलकाता से आए कलाकारों ने आंतरिक सज्जा तथा देवी की प्रतिमा के समीप पारंपरिक दृश्यों को मूर्त रूप देकर पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष पंडाल निर्माण एवं सज्जा पर लगभग पचास लाख रुपये की लागत आई है। आयोजन समिति का कहना है कि इस व्यय का वहन पूर्णत: भक्तों के सहयोग और क्षेत्रीय नागरिकों के योगदान से संभव हुआ है। समिति सदस्यों का विश्वास है कि धार्मिक आस्था और सामूहिक सहयोग की इस मिसाल से समाज में एकता और सद्भावना की भावना और प्रबल होगी।
इस अवसर पर समिति के सक्रिय सदस्यों—अनिल सिंह, विनोद सिंह, भीम नोनियां, उमेश तांती, दिनेश नोनियां, अमरनाथ शर्मा, रणधीर मोची, मनोज नोनियां, प्रह्लाद राम, शिवशंकर साव और भगवान शर्मा—ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी ने संयुक्त रूप से बताया कि दुर्गापूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और लोक-जीवन की धड़कन है।

पूरे पंडाल परिसर में विभिन्न आकर्षक झांकियाँ, पारंपरिक लोकसंगीत तथा प्रकाश सज्जा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उद्घाटन समारोह के उपरांत क्षेत्र के नागरिकों ने परिवार सहित पंडाल का भ्रमण कर अद्वितीय शिल्पकला का अवलोकन किया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा तथा भीड़-नियंत्रण की भी सुदृढ़ व्यवस्था की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
धेमोमैन की यह दुर्गापूजा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और सामूहिक एकजुटता का भी दर्पण है। समिति को विश्वास है कि आगामी दिनों में यहाँ आने वाले श्रद्धालु न केवल माँ दुर्गा के दर्शन करेंगे, बल्कि भारतीय कला, शिल्प और लोक-संस्कृति की झलक भी देख पाएँगे।














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