
आसनसोल : रेल नगरी चित्तरंजन का 6 नंबर पल्लि दुर्गा पूजा कमेटी इस बार श्रद्धा और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रही है। समिति ने अपनी थीम “एक पेड़, एक प्राण” को केंद्र में रखकर पर्यावरण बचाने का संदेश देने का अनूठा प्रयास किया है।

पंडाल में प्रवेश करते ही हरियाली का अद्भुत संसार नजर आता है। करीब छह माह की अथक मेहनत के बाद यहां ऐसा माहौल तैयार किया गया है, मानो दर्शक किसी प्राकृतिक उपवन में पहुंच गए हों। मां दुर्गा की प्रतिमा को भी इस तरह सजाया गया है कि उनके चारों ओर हरियाली का आभामंडल फैला दिखाई देता है।

समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, इस थीम को साकार करने में लगभग 10 लाख रुपये का बजट खर्च हुआ है। पंडाल परिसर में 21 किस्म के पौधों की सजीव प्रस्तुति की गई है, जबकि लगभग आठ हजार पौधों से पूरे स्थल को सजाया गया है। द्वार पर बेल-पत्तियों की सजावट, मंडप में सुगंधित फूलों की महक और झूमर जैसी लटकती हरियाली ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और प्राकृतिक बना दिया है।
स्थानीय श्रद्धालु और आगंतुक मानते हैं कि इस वर्ष की पूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को पर्यावरण बचाने का सार्थक संदेश भी दे रही है। समिति के सदस्य बताते हैं कि आज प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और लगातार बढ़ते तापमान से मानव जीवन संकट में है। ऐसे में पेड़ों को संरक्षित करने का संकल्प सबसे बड़ा धार्मिक कर्म है।
इस पूजा का आयोजन लगातार 74 वर्षों से होता आ रहा है और हर वर्ष समिति कुछ नया प्रस्तुत करती है। सालभर सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों से जुड़ने वाली यह संस्था अब इलाके में समाजसेवा का प्रतीक बन चुकी है।

शाम ढलते ही पंडाल की सजावट और लाइटिंग श्रद्धालुओं को खींच लाती है। हरियाली से सजे इस स्थल पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी प्राकृतिक माहौल का आनंद उठाते हैं। लोग पंडाल में प्रवेश करते ही “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” जैसे संदेशों से प्रेरित होते हैं।
चित्तरंजन की इस अनूठी पहल ने दुर्गा पूजा को नई दिशा दी है। धार्मिक आस्था और पर्यावरण चेतना का ऐसा मेल विरले ही देखने को मिलता है। इस प्रयास ने न केवल चित्तरंजन बल्कि पूरे पश्चिम बर्दवान जिले में चर्चा का केंद्र बना दिया है।














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