
आसनसोल : काली पहाड़ी स्थित एसबीएसटीसी टर्मिनल परिसर में महान स्वतंत्रता सेनानी सिद्धू-कानू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर राज्य के कानून मंत्री मलय घटक, आसनसोल नगर निगम के मेयर परिषद सदस्य गुरदास चटर्जी, विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आदिवासी स्वाभिमान और अधिकारों की पुनः स्मृति का भी मंच बना। वक्ताओं ने कहा कि सिद्धू-कानू का संघर्ष केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि वर्तमान में भी सामाजिक चेतना का प्रतीक है।

उन्होंने संथाल विद्रोह के माध्यम से औपनिवेशिक और सामंती अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की, और आज भी वे आदिवासी पहचान और आत्मसम्मान के अमिट प्रतीक बने हुए हैं।मंत्री मलय घटक ने अपने संबोधन में कहा कि “राज्य की ममता बनर्जी सरकार आदिवासी समाज के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है।” उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़ी कई योजनाएं, जैसे ‘जल, जंगल, जमीन’ की रक्षा, छात्रवृत्ति योजना, आदिवासी हाट और सांस्कृतिक उत्सवों को समर्थन प्रदान किया जा रहा है।

स्थानीय आदिवासी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस अवसर पर सरकार से कुछ प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें शैक्षणिक आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, और आदिवासी सांस्कृतिक पहचान की विधिसम्मत रक्षा शामिल है।कार्यक्रम शांति, श्रद्धा और आत्मगौरव के वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें आम लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि सिद्धू-कानू का आदर्श आज भी जनचेतना में जीवित है, और समाज उनके बलिदान को केवल याद नहीं करता, बल्कि उससे प्रेरणा भी लेता है।














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