
आसनसोल : कोयलांचल क्षेत्र के लाखों भू-स्वामियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता में भूमि अधिग्रहण मुआवजा नीति में क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की। अब तक केवल नौकरी देने की परंपरा थी, लेकिन अब एकमुश्त करोड़ों की राशि या वार्षिकी योजना के रूप में मुआवजे के दो नए विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। इस फैसले से विशेष रूप से सीमांत किसानों और स्वरोजगार की चाह रखने वाले परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा।
क्या हैं नए मुआवजा विकल्प?
ईसीएल की नई नीति के तहत जमीन देने वालों को दो विकल्प मिलेंगे:एकमुश्त मुआवजा (OTL):दो एकड़ जमीन देने पर ₹89 लाख से शुरू होकर प्रीमियम क्षेत्र के हिसाब से और भी अधिक राशि मिलेगी। यह राशि एकमुश्त दी जाएगी, जिससे लाभार्थी तुरंत बड़ी पूंजी का उपयोग स्वरोजगार या अन्य जरूरतों में कर सकेंगे।वार्षिकी योजना (अन्युत योजना):इसके तहत प्रत्येक महीने ₹44,000 से लेकर ₹68,169 तक की राशि दी जाएगी। यह योजना 45 वर्षों तक मान्य रहेगी और हर वर्ष इसमें 1% की वृद्धि सुनिश्चित की गई है। यदि भू-स्वामी की मृत्यु होती है, तो लाभ जीवनसाथी को हस्तांतरित होगा।

प्रो राटा लाभ की विशेषता
इस योजना की एक अनूठी बात यह है कि यह प्रो राटा आधार पर लागू होगी, अर्थात जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है, वे भी अनुपातिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इससे उन सीमांत किसानों को भी पहली बार मुआवजे की सीधी आर्थिक ताकत मिलेगी, जो पहले नौकरी के मानकों में नहीं आते थे।
किसे होगा सबसे अधिक लाभ?
वे किसान जिनके पास पर्याप्त जमीन नहीं थी और जिन्हें अब तक नौकरी नहीं मिल पाती थी।युवा, जो स्वरोजगार या उद्यमिता में आगे बढ़ना चाहते हैं।ऐसे परिवार, जिनके पास पहले से आजीविका का कोई स्रोत है, वे अब मासिक आमदनी के भरोसे आगे बढ़ सकेंगे।

ईसीएल की समावेशी पहल
ईसीएल का यह कदम केवल मुआवजा तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी द्वारा:वित्तीय सलाह देने की व्यवस्था की जाएगी।कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे ताकि लाभार्थी अपने पैसों का सही उपयोग कर सकें।ईसीएल प्रवक्ता ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा,“हमारी नई मुआवजा नीति केवल भुगतान नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम है। यह नीति आर्थिक स्थिरता देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की राह को भी मजबूत करेगी।”क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक?अब मुआवजा नौकरी तक सीमित नहीं।सीमांत किसान भी प्रत्यक्ष रूप से करोड़पति बनने की स्थिति में।वार्षिकी योजना से वरिष्ठ नागरिकों को स्थायी आमदनी।युवा पीढ़ी के लिए आर्थिक आज़ादी का मार्ग प्रशस्त।
भविष्य के लिए उम्मीद
ईसीएल की यह नीति कोयला क्षेत्र में कार्यरत लाखों परिवारों की आर्थिक तस्वीर को बदलने वाली साबित हो सकती है। यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि समाज के निचले स्तर तक आर्थिक न्याय पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है।इस निर्णय का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी व्यापक रूप से देखा जा सकता है, क्योंकि यह नीति गरीब, ग्रामीण और सीमांत वर्गों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है।














Users Today : 5
Users Yesterday : 14