
दुर्गापुर : पश्चिम बर्दवान जिले के दुर्गापुर शहर से चार दिनों से लापता किशोर सुरजीत रुइदास (15) का शव मंगलवार रात को कोलकाता के बल्लीगंज रेलवे यार्ड से बरामद किया गया। किशोर की मौत हाईटेंशन बिजली लाइन से करंट लगने के कारण हुई, जब वह कथित तौर पर रेलवे वैगन से कोयला उतार रहा था। घटना ने पूरे शालबागान इलाके को हिला कर रख दिया है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया। बुधवार सुबह लोगों ने क्षेत्र में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया और इलाके के एक घर पर पथराव और तोड़फोड़ की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई अवैध कारोबारी गरीबी का फायदा उठाकर बच्चों से खतरनाक कार्य करवाते हैं, जैसे कि रेलवे वैगन से कोयला और अन्य सामग्री उतरवाना, और बदले में केवल बीस से तीस रुपये मजदूरी देते हैं।

सुरजीत रुइदास भी इन्हीं में से एक था। परिजनों के अनुसार, वह चार दिन पहले घर से निकला था, तब से उसका कोई अता-पता नहीं था। बाद में मंगलवार रात को कोलकाता के बल्लीगंज स्थित रेलवे यार्ड में एक वैगन के भीतर उसका शव बरामद किया गया। रेलवे अधिकारियों ने शव मिलने के बाद जीआरपी को सूचना दी, जिसने पोस्टमार्टम के लिए शव को एनआरएस अस्पताल, कोलकाता भेज दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध गतिविधि के पीछे क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों और सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं का हाथ है। मृतक के परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने सुरजीत के लापता होने की सूचना दी, तो स्थानीय तृणमूल नेताओं ने कोई सहायता नहीं की।
बुधवार सुबह जब तृणमूल कांग्रेस के नेता नयन मालाकार शोक जताने मृतक के घर पहुंचे, तो गुस्साए लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनकी निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई। भीड़ ने यह भी आरोप लगाया कि नेता केवल दिखावे के लिए पहुंचे हैं, जबकि संकट की घड़ी में उन्होंने कोई मदद नहीं की।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। दुर्गापुर कोक ओवन थाना पुलिस ने कहा कि मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलेक्ट्रिक विभाग से तकनीकी जांच के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि होगी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह के अवैध कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों को सख्त सजा दी जाए और गरीब बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। सुरजीत की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर उन काले कारोबारों की परतें खोली हैं, जो गरीबों की मजबूरी पर पनप रहे हैं।














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