
आसनसोल : रविवार को पूर्व मेयर एवं भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आसनसोल नगर निगम जानबूझकर हज़ार करोड़ रुपये से अधिक के बकाया की वसूली नहीं कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब कुछ सिर्फ मीडिया और न्यायालय को दिखाने के लिए एक नाटक मात्र है।
तिवारी ने कहा कि जमुरिया और रानीगंज क्षेत्रों के 11 बड़े कारखानों पर करीब 1000 करोड़ रुपये का हाउस टैक्स बकाया है, फिर भी नगर निगम प्रशासन उनके खिलाफ कोई ठोस और कानूनी कार्रवाई नहीं कर रहा। इसके विपरीत, आम नागरिकों से 500 से 1000 रुपये के बकाया टैक्स के लिए नोटिस और दंडात्मक कार्यवाही की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम अधिकारी फोटो खिंचवाने के लिए बुलडोजर लेकर कारखानों के गेट तक जाते हैं, लेकिन कार्यवाही किए बिना ही मौन साधकर लौट आते हैं। तिवारी ने कहा कि यह सब कोलकाता हाई कोर्ट में प्रस्तुत करने योग्य औपचारिकता मात्र है, ताकि यह दर्शाया जा सके कि निगम सक्रिय है।

जितेंद्र तिवारी ने यह भी दावा किया कि कुछ निगम अधिकारी, मेयर, डिप्टी मेयर और चेयरमैन की संरक्षण प्राप्त टीम कारखाना मालिकों से सौदेबाज़ी कर रही है। उन्होंने कहा, “कारखाना मालिकों को नगर निगम का ‘दामाद’ बना दिया गया है। करोड़ों के जुर्माने को लाखों में समेटकर अंदरखाने सांठगांठ की जा रही है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आम नागरिकों पर इतनी कठोरता बरती जाती है, तो बड़े उद्योगों पर यह रियायत क्यों? उनका कहना था कि इन बकायेदार कारखानों से अगर वसूली की जाए तो हर वार्ड में 10 करोड़ रुपये का विकास संभव हो सकता है।
पूर्व मेयर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नगर निगम प्रशासन ने शीघ्र कोई सख्त और पारदर्शी कार्यवाही नहीं की, तो वे एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेंगे। तिवारी बोले, “जनता सब देख रही है। वे मूर्ख नहीं हैं। उन्हें यह समझ में आ गया है कि यह पूरा तंत्र दिखावे और सौदेबाज़ी पर आधारित है।”

उन्होंने कहा कि आसनसोल के 106 वार्डों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति खराब है – कहीं सड़कें जर्जर हैं, कहीं जल निकासी की व्यवस्था ठप है, तो कहीं प्रकाश व्यवस्था नहीं है। जबकि इतने बड़े राजस्व की वसूली से हर वार्ड में विकास की नई धारा बह सकती है।
अंत में तिवारी ने दो टूक कहा, “हमारे पास सबूत हैं – बकायेदारों की सूची, उनके खिलाफ लंबित कार्रवाई और उससे जुड़े दस्तावेज। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह मामला हम जनता के साथ न्यायालय तक भी ले जाएंगे।”
इस पूरे प्रकरण ने नगर निगम की कार्यशैली को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन जवाब देता है या चुप्पी साधे रहता है।














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