
आसनसोल : मैथन स्टील एंड पावर लिमिटेड (एमएसपीएल) कारखाने में मजदूर संजय कुमार की मौत के बाद फैक्ट्री में फैले तनाव, नाकेबंदी और असंतोष का अंत गुरुवार शाम हो गया। श्रमिक संगठनों की पहल और परिजनों की मांग पर फैक्ट्री प्रबंधन ने मृतक के परिवार को 12 लाख रुपये की एकमुश्त राशि, जीवनभर पेंशन, 7 लाख रुपये की ईएसआई-पीएफ राशि, 50 हजार रुपये नकद सहायता और यात्रा-रहने का सारा खर्च वहन करने का लिखित आश्वासन दिया।

10 जुलाई की सुबह साढ़े नौ बजे भट्ठा नंबर दो के पास लोहे का एक शेड गिर गया था, जिससे बिहार के गया निवासी मजदूर संजय कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि राजकुमार यादव, सीताराम यादव, पंकज कुमार, बासुदेव यादव और राजा कुमार घायल हो गए थे। राजकुमार यादव को आसनसोल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद मजदूरों ने शव उठाने से इनकार कर दिया और उचित मुआवजे की मांग पर अड़ गए। फैक्ट्री गेट के बाहर भाजपा समर्थकों ने भी प्रदर्शन कर नारेबाजी की, जिसे पुलिस ने नियंत्रित किया। एसीपी कुल्टी जावेद हुसैन, सलानपुर थाना प्रभारी अमित कुमार हाटी, रूपनारायणपुर व कल्याणेश्वरी फाड़ी प्रभारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।
इसी बीच तृणमूल श्रमिक संगठन आईएनटीटीयूसी के अध्यक्ष मनोज तिवारी और उपाध्यक्ष भोला सिंह की मध्यस्थता में कारखाना प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच लंबी बातचीत हुई। शाम सात बजे तक चली इस वार्ता में प्रबंधन ने लिखित रूप से मुआवजा और अन्य सहायता देने का वादा किया, जिसके बाद कारखाने में स्थिति सामान्य हुई।

प्रबंधन ने बताया कि संजय कुमार की पत्नी संजू कुमारी को तीन-चार दिनों में 12 लाख रुपये उनके बैंक खाते में जमा किए जाएंगे। इसके अलावा 50 हजार रुपये तत्काल नकद, ईएसआई-पीएफ आदि के 7 लाख रुपये, जीवनभर पेंशन, और बच्चों व बुजुर्ग माता-पिता के लिए भरण-पोषण भत्ता दिया जाएगा।शव को शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद गया भेजा गया, जिसकी यात्रा, एम्बुलेंस और ठहरने का खर्च फैक्ट्री ने उठाया। श्रमिक नेताओं ने बताया कि संजय के परिवार की आजीविका पूरी तरह उन्हीं पर निर्भर थी, लेकिन प्रबंधन के इस सकारात्मक रुख से परिजनों को राहत मिली है।यह घटना न केवल कामगारों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संगठित श्रमिक शक्ति और मानवीयता के साथ संवाद से समाधान संभव है। फैक्ट्री प्रबंधन से अब भविष्य में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग की जा रही है।














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