
श्रीकांत पाण्डेय
आसनसोल : औद्योगिक इलाकों में सिलिकोसिस बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। जिले में इस बीमारी से लगातार हो रही मौतों और बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। निर्णय लिया गया है कि अब हर महीने सिलिकोसिस पर विशेष स्वास्थ्य जांच और जागरूकता शिविर लगाया जाएगा। इसी क्रम में आगामी मंगलवार, 15 जुलाई को सलानपुर प्रखंड के माझी पाड़ा इलाके में पहला शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा।
क्या है सिलिकोसिस?
सिलिकोसिस एक घातक फेफड़ों की बीमारी है, जो मुख्य रूप से पत्थर तोड़ने, क्रशर, खदानों और सीमेंट उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों को होती है। इस रोग में फेफड़ों में सिलिका डस्ट जमा हो जाती है, जिससे धीरे-धीरे सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों का खराब होना और अंततः मृत्यु तक हो सकती है।

जिले में क्यों बढ़ रही है समस्या?
सलानपुर, बर्नपुर, बाराबनी, जामुड़िया और पांडवेश्वर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में पत्थर खदान और क्रशर इकाइयों की भरमार है। यहां हजारों मजदूर लंबे समय से कार्यरत हैं, जिनमें से अधिकांश बिना सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक काम कर रहे हैं। लंबे समय तक सिलिका डस्ट में काम करने के कारण कई मजदूर इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले दो वर्षों में ही दर्जनों लोगों की मृत्यु सिलिकोसिस से हो चुकी है।
प्रशासन की नई पहल
जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर सलानपुर प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र द्वारा इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है। हर महीने एक शिविर आयोजित कर बीमारी की पहचान और प्राथमिक इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा मरीजों को सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क इलाज और दवा उपलब्ध कराई जाएगी।

लोगों से की गई अपील
स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने पत्थर खदान, क्रशर इकाइयों और निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों और व्यवसायियों से अपील की है कि वे इस शिविर का लाभ उठाएं। उन्हें कहा गया है कि अगर शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान हो जाए तो इसका इलाज आसान हो सकता है। जांच, एक्स-रे, खून की जांच व परामर्श शिविर में बिल्कुल मुफ्त किया जाएगा।
ग्रामीणों और संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय सामाजिक संगठन “जीवन रक्षा मंच” के संयोजक विनीत झा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “यह शिविर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा जिनके सदस्य वर्षों से बीमारी की चपेट में हैं। यदि सरकार इसकी स्थायी व्यवस्था करे तो और बेहतर होगा।”
भविष्य की योजना
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यह शिविर सिर्फ सलानपुर ही नहीं, बल्कि बाराबनी, अंडाल, कुल्टी और रानीगंज क्षेत्र में भी लगाए जाएंगे। इससे न केवल बीमारी की पहचान में मदद मिलेगी, बल्कि बीमार लोगों को बीपीएल कार्ड धारक के आधार पर आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।प्रशासन का यह कदम ना केवल पीड़ितों के जीवन को बचा सकता है, बल्कि एक बड़े औद्योगिक क्षेत्र में जागरूकता फैलाकर भविष्य की त्रासदियों को रोकने में मददगार साबित होगा।














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