
आसनसोल : जब पूरा देश विज्ञान, तकनीक और चंद्र-सूर्य मिशनों की उपलब्धियों पर गर्व कर रहा है, उसी समय आसनसोल के रामपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र से एक सनसनीखेज और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसमें एक आदिवासी महिला और उसके परिवार को ‘डायन’ बताकर सामाजिक बहिष्कार का शिकार बनाया गया है।पीड़िता कांता हांसदा ने बताया कि उनके परिवार को लंबे समय से गांव के कुछ लोगों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। लेकिन अब यह प्रताड़ना खुले तौर पर गालियों और सामाजिक बहिष्कार के रूप में सामने आ चुकी है। कांता के अनुसार, “लोग हमें कहते हैं कि हमारे परिवार में कोई डायन है, जो गांव के लोगों को बीमार कर रही है। ये सरासर झूठ है। हम गरीब हैं, इसलिए हमें आसानी से निशाना बनाया जा रहा है।”

अंधविश्वास के खिलाफ विज्ञान मंच का हस्तक्षेप
घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय विज्ञान और युक्तिवादी समिति (Indian Science and Rationalists Association) के रॉबिन हेंब्रम मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ कांता हांसदा का मामला नहीं, यह पूरे समाज की विज्ञानविरोधी सोच और महिला विरोधी मानसिकता का परिचायक है। जब हम थाने में शिकायत लेकर पहुँचे, तो पुलिस भी टालमटोल करने लगी और कहा कि पहले गांव में शांति हो जाने दें, फिर कार्रवाई करेंगे।”
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
स्थानीय थाने की निष्क्रियता ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। एफआईआर दर्ज नहीं होने के कारण अब विज्ञान मंच के कार्यकर्ता प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। रॉबिन हेंब्रम ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वह जिला प्रशासन और राज्य महिला आयोग तक यह मामला पहुँचाएंगे।

पुनर्वास और जनजागरूकता की माँग
विज्ञान मंच और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि—पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा दी जाए,दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो,गांव में जनजागरूकता अभियान चलाकर अंधविश्वास के खिलाफ शिक्षा दी जाए।
क्या वाकई हम 21वीं सदी में हैं?
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम सच में आधुनिक भारत में जी रहे हैं? आज भी डायन प्रथा जैसी बर्बर कुप्रथाएं समाज के पिछड़े हिस्सों में मौजूद हैं, जो महिलाओं और गरीब तबके के परिवारों को मानवता से ही बाहर कर देती हैं।














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