2400 एकड़ भूमि पर खनन की तैयारी, रोजगार की बड़ी उम्मीद

Facebook
Twitter
WhatsApp

WhatsApp Image 2024 07 12 at 13.27.59

बीरभूम :  पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के देउचा-पचामी क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। राज्य सरकार के अधीनस्थ पश्चिम बंगाल विद्युत विकास निगम लिमिटेड (WBPDCL) ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के लिए माइन डेवलपर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रविवार को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परियोजना के प्रथम चरण के लिए छह खनन कंपनियों ने अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली है और उनके प्रस्तावों का मूल्यांकन जारी है।

इन छह कंपनियों में जेएसएम माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, हिंडाल्को कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, मिनोवा इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज, माइनशन लिमिटेड, माहेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड और पोलावरम प्रोजेक्ट प्रमुख हैं। इन कंपनियों में से किसी एक का चयन कर उसे माइन डेवलपर कम ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया जाएगा। चुनी गई कंपनी न केवल खनन क्षेत्र को विकसित करेगी, बल्कि कोयला उत्पादन का भी कार्यभार संभालेगी।

IMG 20250511 WA0050

देउचा पचामी कोयला परियोजना को राज्य की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। अनुमान है कि इस परियोजना से प्रारंभिक चरण में लगभग 1,000 से 1,200 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हो सकेगा। दीर्घकाल में इससे राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सशक्त आधार मिलेगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं कई बार इस परियोजना की उपयोगिता को रेखांकित कर चुकी हैं। उन्होंने पहले स्पष्ट किया था कि देउचा पचामी परियोजना के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद राज्य को कोयला और बिजली की आपूर्ति में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी।

यह परियोजना राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयास से साकार हो रही है और इसमें लगभग 35,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त, इससे हजारों स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिलने की भी उम्मीद है, जिससे बीरभूम जिले और आस-पास के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को बल मिलेगा।

IMG 20240918 WA0025

हालांकि यह भी उल्लेखनीय है कि अतीत में इस परियोजना को लेकर कुछ जनविरोध और पर्यावरणीय चिंता सामने आई थी। सरकार का दावा है कि भूमि अधिग्रहण से लेकर पुनर्वास तक सभी प्रक्रियाएँ पारदर्शी और मानवीय होंगी। सरकार ने स्थानीय निवासियों को आश्वस्त किया है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, और पुनर्वास नीति के अंतर्गत सभी प्रभावितों को उपयुक्त मुआवज़ा और सुविधा दी जाएगी।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि किस कंपनी को अंतिम रूप से खनन कार्य की ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है और परियोजना कब धरातल पर पूर्ण रूप से आकार लेना शुरू करती है।

Leave a Comment

Leave a Comment

[democracy id="1"]

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 4 1 7 6 2
Users Today : 11
Users Yesterday : 16