
दुर्गापुर : श्रावण मास के दूसरे सोमवार को पश्चिम बर्धमान ज़िले के प्रसिद्ध राधेश्वर शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए भक्तजन सुबह से ही मंदिर परिसर में एकत्रित होने लगे। हर किसी की यही कामना थी कि महादेव उनकी मनोकामनाएं पूरी करें।
राधेश्वर मंदिर, जो अतीत में राजा बल्लाल सेन की बीमारी के चमत्कारी उपचार का केंद्र रहा है, आज भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि श्रावण के सोमवार को यदि सच्चे भाव से शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाए, तो जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं।

इस बार मंदिर प्रबंधन ने भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों की सुविधा हेतु एक अभिनव पद्धति अपनाई है। अब गर्भगृह के बाहर ही एक पात्र में जल डालने की व्यवस्था की गई है। वह जल विशेष पाइपलाइन के माध्यम से शिवलिंग के शीर्ष पर स्वतः गिरता है। इससे न केवल भीड़ में धक्का-मुक्की से बचाव हो रहा है, बल्कि श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक दर्शन और पूजा करने का अवसर भी मिल रहा है।
सुबह से ही अजय और दामोदर नदियों से जल लाने का क्रम आरंभ हो गया। श्रद्धालु सिर पर घड़े उठाए मंदिर की ओर बढ़ते देखे गए। भक्तों की श्रद्धा और उत्साह देखते ही बनता था।

मंदिर परिसर में कांकसा थाने के अंतर्गत मालनदिघी पुलिस चौकी की ओर से सुरक्षा व्यवस्था चुस्त रही। महिला और पुरुष दोनों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
भक्तों में पायल घोष नामक एक युवती ने बताया, “मैं सुबह 9 बजे से लाइन में खड़ी हूं। लग रहा है कि दोपहर होते-होते भीड़ और बढ़ जाएगी। लेकिन शिव की पूजा के लिए कुछ देर की प्रतीक्षा भी सुखद अनुभव है।”
श्रावण सोमवार की इस अलौकिक भक्ति में श्रद्धा, व्यवस्था और सुरक्षा का सुंदर समन्वय देखने को मिला। भक्तों की आस्था के साथ-साथ प्रशासन की व्यवस्था भी प्रशंसनीय रही।














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