
आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मेयर जीतेंद्र तिवारी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण भाषायी मुद्दे को लेकर प्रशासन के समक्ष गंभीर मांग रखी है। उन्होंने बर्दवान जिला मजिस्ट्रेट को एक आधिकारिक संदेश भेजते हुए सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों के साइनबोर्डों पर बंगाली भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की है।
प्रधानमंत्री ने दी बंगाली को शास्त्रीय भाषा की मान्यता
तिवारी ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि बंगाली भाषा को भारत सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है, जो इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्ता को दर्शाता है। ऐसे में बंगालीभाषी बहुल क्षेत्र आसनसोल में बंगाली भाषा की उपेक्षा अस्वीकार्य है।

सरकारी साइनबोर्डों से गायब बंगाली, उठे विरोध के स्वर
पूर्व मेयर ने दावा किया कि आसनसोल क्षेत्र में कई सरकारी साइनबोर्डों पर केवल हिंदी या अंग्रेज़ी में जानकारी दी जा रही है, जबकि राज्य की प्रमुख भाषा बंगाली को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह न केवल भाषायी अपमान है, बल्कि स्थानीय पहचान के साथ अन्याय भी।

भाषायी सम्मान का मुद्दा, सियासी सरगर्मी तेज़ होने की संभावना
यह मांग केवल एक प्रशासनिक निर्देश की बात नहीं है, बल्कि भाषायी सम्मान का प्रश्न बन चुकी है। तिवारी की इस पहल को लेकर स्थानीय जनमानस और राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। संभावना है कि आने वाले दिनों में भाजपा इस मुद्दे को और अधिक तीव्रता से उठाएगी, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ेगा।
तिवारी ने की जनभावनाओं के सम्मान की अपील
उन्होंने जिला प्रशासन से यह भी अपील की कि आसनसोल में रहने वाले लाखों बंगालीभाषी नागरिकों की भावनाओं का सम्मान किया जाए और तत्काल प्रभाव से सभी साइनबोर्डों पर बंगाली भाषा का समुचित स्थान सुनिश्चित किया जाए।














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