
आसनसोल : भीषण गर्मी के बीच बर्नपुर के काला झरिया इलाके में पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) विभाग की मुख्य पाइपलाइन टूटने से रानीगंज, जमुड़िया और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। बीते दो दिनों से पानी की आपूर्ति ठप है, जिससे हजारों की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। महिलाएं और बुजुर्ग सुबह से ही खाली बाल्टी लेकर पानी के इंतजार में बैठे नजर आ रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसनसोल नगर निगम कार्यालय में गुरुवार देर शाम एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मेयर विधान उपाध्याय ने की, जिसमें डिप्टी मेयर वसीम उल हक, चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, पार्षद अभिजीत घटक, और इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मेयर उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि “तुरंत राहत के तौर पर 13 जल टैंकरों को रानीगंज और उससे सटे इलाकों में भेजा जा रहा है। इसके साथ ही अमृत नगर के जल स्रोत से कुछ इलाकों को अस्थायी तौर पर पानी की आपूर्ति की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि “नगर निगम खुद अपने स्तर से जिन इलाकों में पानी की भारी किल्लत है, वहाँ टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाएगा।”
इंजीनियरों की टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे पाइपलाइन मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर करें ताकि जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल हो सके। नगर निगम अधिकारियों ने दावा किया है कि पाइपलाइन टूटने की मुख्य वजह जर्जर संरचना और अत्यधिक जल दबाव है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से पानी की मात्रा लगातार घट रही थी, लेकिन विभाग की तरफ से कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। रानीगंज की सुभाष कॉलोनी, साउथ कॉलोनी, स्कूल रोड, तेलीपाड़ा, चंदा मोड़, जमुड़िया बाजार सहित दर्जनों वार्डों में लोग टैंकर के इंतजार में लाइन लगाकर खड़े हैं।
महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई बुजुर्गों ने कहा कि उन्हें न तो नहाने का पानी मिल रहा है और न ही पीने का। स्थानीय नागरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार फोटो और वीडियो साझा कर नगर निगम को घेर रहे हैं। कुछ ने आरोप लगाया कि चुनावों के बाद जनप्रतिनिधि क्षेत्र में नहीं आते और समस्याओं की सुध नहीं लेते।
हालांकि नगर निगम ने भरोसा दिलाया है कि मरम्मत कार्य दो दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, और भविष्य में ऐसी समस्या न हो इसके लिए स्थायी पाइपलाइन सुधार योजना पर कार्य शुरू किया जाएगा।

इस पूरे मामले ने शासन और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोग पूछ रहे हैं कि जब गर्मियों में पानी की मांग सबसे अधिक होती है, तब क्यों पाइपलाइन व्यवस्था इतनी कमजोर होती है? क्या समय रहते मेंटेनेंस नहीं किया गया?
फिलहाल नगर निगम की पूरी टीम, इंजीनियरिंग विंग के साथ क्षेत्र का दौरा कर रही है, और जहां भी संभव हो वहां बोरिंग और अस्थायी व्यवस्था से पानी देने की योजना बनाई जा रही है। लेकिन तब तक लोगों को पानी के लिए संघर्ष करते रहना होगा।
जल संकट की इस विकट परिस्थिति ने यह सोचने को विवश कर दिया है कि शहरी क्षेत्र में पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी अनिश्चित हो गई है, और शासन-प्रशासन को इसके स्थायी समाधान पर तत्काल कदम उठाने होंगे।














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