
बर्नपुर : आसनसोल के बर्नपुर स्थित इस्को स्टील फैक्ट्री के प्रशिक्षण शिविर में तृणमूल कांग्रेस पार्षद अशोक रुद्र द्वारा बाहरी राज्यों के मजदूरों पर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। रविवार को वायरल हुए इस वीडियो में अशोक रुद्र प्रशिक्षण शिविर में मौजूद मजदूरों से कहते नजर आ रहे हैं, “यह बंगाल है, यहां के युवाओं को हक मिलना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद से हिंदी भाषी मजदूरों में नाराजगी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
वायरल वीडियो में दिखा कि पार्षद ने प्रशिक्षण ले रहे कई मजदूरों से परिचय लिया और उनमें से कई के उत्तर प्रदेश व बिहार से होने की बात पर असहमति जताई। उन्होंने प्रबंधन से मांग की कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई।

भाजपा ने इस मुद्दे को तुरंत लपक लिया। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने बयान दिया, “तृणमूल कांग्रेस अब खुलेआम क्षेत्रवाद की राजनीति कर रही है। यह बंगाल को बांटने और उद्योगों में राजनीतिक हस्तक्षेप का खतरनाक उदाहरण है। राज्य सरकार को इस पर तुरंत जवाब देना चाहिए।” भाजपा नेताओं ने इसे संविधान और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ करार दिया और राज्यव्यापी विरोध का संकेत दिया।
विवाद बढ़ने पर पार्षद अशोक रुद्र ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने किसी को धमकाया नहीं है। मेरी मंशा केवल यह थी कि फैक्ट्री में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। बाहरियों के भरोसे हमारी युवा पीढ़ी बेरोजगारी झेल रही है, यह अन्याय है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बयान को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाया जा रहा है।

फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन घटनास्थल पर काम कर रहे प्रशिक्षु और स्थायी मजदूरों में बेचैनी फैल गई है। कुछ मजदूरों ने आशंका जताई कि राजनीति के हस्तक्षेप से उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। वहीं स्थानीय बेरोजगार युवाओं में उम्मीद जगी है कि आंदोलन से उन्हें रोजगार का अवसर मिलेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में औद्योगिक क्षेत्रों में हिंदी भाषी श्रमिकों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह विवाद आने वाले दिनों में चुनावी मुद्दा बन सकता है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और फैक्ट्री प्रबंधन के रुख पर टिकी हैं।














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