
श्रीकांत पाण्डेय
आसनसोल : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की श्रीपुर-सातग्राम क्षेत्र अंतर्गत भानोड़ा कोलियरी में चरनपुर खुली खदान (ओपन कास्ट माइन) के विस्तार को लेकर मंगलवार को तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। चरनपुरहाटतला गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने कंपनी द्वारा जबरन घर खाली करवाने की कोशिश के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।ईसीएल की टीम ने मंगलवार को चरनपुरहाटतला के लगभग 128 घरों को नोटिस जारी किया, जिसमें स्पष्ट रूप से 6 अगस्त को काजरा स्थित ईसीएल कार्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, अधिकांश ग्रामीणों ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया और कई घरों की दीवारों पर जबरन नोटिस चिपकाए गए। अब तक केवल 40 से 45 लोगों ने नोटिस स्वीकार किया है, बाकी लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
नोटिस वितरण के दौरान हुआ हंगामा
नोटिस वितरण के लिए पहुंचे ईसीएल के डिप्टी पर्सनल मैनेजर रणबीर राठौर, एक महिला कर्मचारी और सुरक्षा गार्डों की टीम जैसे ही इलाके से वापस लौटने लगी, तभी कुछ आक्रोशित ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। विवाद बढ़ने पर वहां जमकर हंगामा हुआ और टीम को क्षेत्र से भागकर वापस जाना पड़ा। स्थिति को देखते हुए, भविष्य में पुलिस बल की तैनाती की संभावना जताई जा रही है।

ग्रामीणों की पीड़ा – घर भी छीन लोगे?
स्थानीय महिलाओं ने रोष प्रकट करते हुए कहा,“हम पहले ही खदान के धुएं, विस्फोट और ध्वनि प्रदूषण से त्रस्त हैं। अब घर से भी बेदखल किया जा रहा है। बिना मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास के हम कहीं नहीं जाएंगे।”एक अन्य बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा कि यह इलाका उनके पूर्वजों की ज़मीन है, जिसे वे किसी कीमत पर नहीं छोड़ सकते। उन्होंने सरकार और ईसीएल पर आरोप लगाया कि खदान विस्तार के नाम पर आम लोगों को उजाड़ा जा रहा है।
विकास बनाम विस्थापन – पुरानी कहानी दोहराई जा रही
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर “विकास” के नाम पर हो रहे गैर-जनसंवेदी निर्णयों को उजागर किया है। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से देखें तो देशभर में खनन परियोजनाओं के विस्तार के दौरान अक्सर स्थानीय समुदायों की उपेक्षा होती है। आदिवासी और ग्रामीण आबादी को मुआवजे और पुनर्वास योजनाओं से वंचित कर जबरन हटाया जाता है। चरनपुरहाटतला की स्थिति भी उसी क्रूर प्रक्रिया का प्रतीक बन गई है।

प्रशासन अब भी मौन, तनाव बढ़ने की आशंका
ईसीएल और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो प्रशासन आगामी दिनों में इस विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ त्रिपक्षीय बैठक करने की योजना बना रहा है।
एक और विस्थापन की दहलीज़ पर चरनपुर
चरनपुरहाटतला के ग्रामीण वर्तमान में असमंजस, भय और आक्रोश की स्थिति में हैं। जहां एक ओर सरकार और खनन कंपनियां कोयला उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों के जीवन, घर और भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यदि जल्द ही संतुलित समाधान नहीं निकाला गया तो यह मामला और अधिक गंभीर सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है।














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