
आसनसोल : राज्य और देश की सियासत को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित कोयला तस्करी मामले में मंगलवार को आसनसोल स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में एक बार फिर हलचल देखी गई। इस बहुचर्चित प्रकरण में सुनवाई के दौरान कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) समेत तीन वरिष्ठ कोयला अधिकारियों की व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेशी हुई।यह वही मामला है, जिसमें करोड़ों रुपये की अवैध कोयला खनन, नकली बिलिंग, माफिया नेटवर्क, रेलवे और खान विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगे हैं। यह मामला न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि केंद्र सरकार के अधीन कोयला मंत्रालय और उसके अधीनस्थ संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है।
अदालत परिसर में अभूतपूर्व सुरक्षा
मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई की विशेष अदालत के बाहर सुरक्षा के सख्त इंतज़ाम किए गए थे। अदालत परिसर के चारों ओर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला बेहद संवेदनशील और उच्चस्तरीय चेहरों से जुड़ा हुआ है।सुरक्षा कारणों से अदालत के भीतर पत्रकारों और आम जनों की सीमित उपस्थिति रही। इस दौरान मुख्य आरोपी अनुपम माजी उर्फ लाला, जयदेव मंडल, नारायण खड़गे और अन्य भी अदालत में हाजिर हुए।

हालांकि इस केस का एक चर्चित नाम – विनय मिश्रा – मंगलवार को भी अदालत में हाजिर नहीं हुआ। टीएमसी से जुड़ा यह व्यक्ति पिछले कई महीनों से फरार बताया जा रहा है। सीबीआई ने पहले ही उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस और गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा है, लेकिन अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।सूत्रों के अनुसार, विनय मिश्रा की भूमिका इस तस्करी रैकेट में कड़ी के रूप में देखी जा रही है, जो माफिया और राजनीतिक नेतृत्व के बीच सेतु का काम करता था।
उच्चस्तरीय जवाबदेही की ओर बढ़ रही है जांच
कोल इंडिया के CMD की पेशी ने मामले को एक नए मोड़ पर ला दिया है। अधिवक्ता शेखर कुंडू ने बताया, “यह दर्शाता है कि सीबीआई अब जांच के अंतिम और निर्णायक चरण में है। अब सवाल केवल स्थानीय स्तर के कर्मचारियों का नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में बढ़ रही है।”हालांकि, सीबीआई की ओर से अदालत में इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया, लेकिन सूत्रों का मानना है कि आने वाले समय में कई और बड़े नामों की जांच में शामिल होने की संभावना है।
करोड़ों की तस्करी, नकली बिलिंग और विभागीय मिलीभगत
इस केस में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपों के अनुसार, एक सुव्यवस्थित माफिया नेटवर्क कई वर्षों से अवैध रूप से कोयले की तस्करी कर रहा था। इस नेटवर्क की जड़ें कोल इंडिया के खदान क्षेत्रों से लेकर रेलवे माल ढुलाई व्यवस्था, खनन कार्यालयों और बिलिंग एजेंसियों तक फैली हुई थीं।तस्करी की राशि करोड़ों रुपये में आँकी जा रही है। यह कोयला बिना रिकॉर्ड के उठाया जाता था, फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे भेजा जाता था और उसे विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से बाजार में खपाया जाता था।

राजनीतिक गलियारों में फिर हलचल
इस केस ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष लगातार सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगा रहा है कि तस्करी के इस रैकेट में कई प्रभावशाली नेताओं की संलिप्तता है, जिन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और सरकार जांच में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं डालेगी। लेकिन विनय मिश्रा जैसे नामों की फरारी और प्रशासनिक चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अगली सुनवाई 29 अगस्त को
अदालत ने मंगलवार को सभी उपस्थित आरोपियों की हाज़िरी दर्ज की और अगली तारीख 29 अगस्त 2025 को तय की है। अदालत ने सभी आरोपियों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें।सीबीआई के वकीलों ने यह भी संकेत दिया कि अगली सुनवाई में कुछ और नए सबूत पेश किए जा सकते हैं, जिससे मामले में और स्पष्टता आएगी।














Users Today : 8
Users Yesterday : 16