
दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर स्थित एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) चिरंजीत धीबर द्वारा मुख्यमंत्री को फेसबुक पर सार्वजनिक चुनौती देने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। शिक्षक ने चुनावी कार्यों में निष्पक्षता की बात करते हुए कहा कि वे केवल अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं और किसी दबाव में नहीं आएंगे।फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधी चुनौती देते हुए लिखा,“कर्तव्य निभाना मेरा अधिकार है,

आपकी नौकरी की दया नहीं चाहिए।”उन्होंने यह भी लिखा कि,“हमें आपसे नौकरी नहीं मिली है, जो आप हमें नौकरी से निकालने की धमकी दें। हम केवल संविधान और चुनाव आयोग के प्रति जवाबदेह हैं।”चिरंजीत धीबर ने आगे कहा कि अब तक प्रशिक्षण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन हमें यह सिखाया गया है कि मतदाता सूची से मृत लोगों और फर्जी नामों को हटाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर अपना ईमान नहीं बेचेंगे, और पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संशोधन कार्य करना चाहते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई लोगों के पास बांग्लादेश और भारत दोनों देशों के वोटर कार्ड हैं, और कुछ ऐसे लोग भी हैं जो उस क्षेत्र में रहते ही नहीं जहां उनका नाम दर्ज है, फिर भी उनका वोट हर चुनाव में पड़ता है। ऐसी अनियमितताओं को दूर करना चुनाव आयोग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

चिरंजीत धीबर की इस हिम्मत को जहां कुछ लोग लोकतंत्र के लिए साहसी कदम मान रहे हैं, वहीं प्रशासनिक स्तर पर इसे अनुशासनहीनता और राजनीतिक विद्रोह के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार इस बयान पर कोई कार्रवाई करती है या चुनाव आयोग इस विषय में स्पष्टीकरण मांगता है।चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए धीबर का यह बयान बताता है कि बीएलओ स्तर तक भी अब जागरूकता और जवाबदेही की भावना जन्म ले रही है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।














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