
बराकर : राज्य सरकार के विकास दावों के बीच बराकर बस स्टैंड की बदहाली ने एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनहीनता उजागर कर दी है। रविवार को यहां बस चालकों, खलासियों और यात्रियों को पेयजल संकट और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझते देखा गया।
बंद वाटर सप्लाई, टंकी पर निर्भरता
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बस स्टैंड पर पहले पेयजल आपूर्ति होती थी, जो अब पूरी तरह बंद है। मजबूरन बस कर्मी यात्रियों के लिए बने दुदानी परिवार द्वारा स्थापित टंकी से पानी लेते हैं। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ता है – जब स्टाफ पानी भरता है, तो यात्रियों के हिस्से में पानी नहीं आता।

शेड और प्रतीक्षालय का भी अभाव
पानी के साथ-साथ बस स्टैंड पर छांव और प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। बारिश या धूप में यात्रियों और स्टाफ को खुले में खड़ा रहना पड़ता है। देर रात आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
अधूरी घोषणाएं, अधूरा विकास
पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी के कार्यकाल में बराकर बस स्टैंड के आधुनिकीकरण की घोषणा की गई थी, लेकिन पद परिवर्तन के बाद यह योजना कागज़ों में ही दफन हो गई। आसनसोल नगर निगम ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
बस कर्मियों की प्रमुख मांगें
बस कर्मियों ने मांग की है कि बस स्टैंड पर स्थायी पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए, बस सफाई व स्नान के लिए अलग टंकी उपलब्ध कराई जाए और यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय व शेड बनवाया जाए। साथ ही पूरे परिसर का पुनर्निर्माण व सौंदर्यीकरण कराने की अपील की गई है।

संगठनों की चुप्पी पर सवाल
आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर समस्या पर कोई यूनियन या सामाजिक संगठन आगे नहीं आया। बस कर्मियों का कहना है कि वे लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं।
जनता व प्रशासन से अपील
स्थानीय लोगों ने कहा कि बराकर बस स्टैंड पर पानी और आश्रय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल सुविधा नहीं, बल्कि प्रशासन का नैतिक दायित्व है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।














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