
दुर्गापुर : पश्चिम बर्धमान ज़िले के दुर्गापुर में मंगलवार को आयोजित भाजपा कार्यकर्ताओं की अहम बैठक के दौरान मंच पर एक पुराने बॉलीवुड गीत के बजने से राजनीतिक माहौल गरमा गया। अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती इस बैठक में विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे थे। उनके आने से काफी पहले से ही कार्यकर्ता नेताजी भवन, डीएसपी टाउनशिप परिसर में जुटने लगे थे। कार्यक्रम स्थल पर स्पीकर के माध्यम से संगीत बज रहा था, लेकिन तभी 1993 की फिल्म फूल और अंगार का गीत “मुझे पीना है पीने दो” बज उठा।
यह गीत मंच पर बजते ही तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर व्यंग्य साधना शुरू कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष उत्तम मुखर्जी ने तीखा हमला करते हुए कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा पहले से ही लड़खड़ा रही थी, और अब इस तरह के गाने बजाकर वह पूरी तरह औंधे मुंह गिरेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मंच पर शराब सेवन संबंधी गीत बजाना आम जनता की समस्याओं का मज़ाक उड़ाने के समान है।

इस पर भाजपा ने भी तृणमूल को करारा जवाब दिया। भाजपा जिला महासचिव अभिजीत दत्ता ने कहा कि इस गीत का नशे से कोई लेना-देना नहीं है। यह सिर्फ़ मनोरंजन के उद्देश्य से बजाया गया था। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि तृणमूल को अपने कामकाज पर ध्यान देना चाहिए और अपनी ‘चरखी में तेल डालना चाहिए’। साथ ही उन्होंने तृणमूल सांसद महुआ मैत्रा पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली में उनके कार्यकलाप सबके सामने हैं।
बैठक में दुर्गापुर पूर्व और पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के मंडल अध्यक्ष, मंडल पदाधिकारी, बूथ अध्यक्ष, पूर्व मंडल अध्यक्ष, जिला व राज्य समिति सदस्य, विभिन्न मोर्चों के संयोजक और सह-संयोजक बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आने वाले चुनाव को देखते हुए संगठन की रणनीति तय करना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना था।
हालांकि बैठक के राजनीतिक संदेश से अधिक चर्चा गीत को लेकर मची रही। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के छोटे-छोटे विवाद चुनावी माहौल में बड़े मुद्दों का रूप ले लेते हैं, क्योंकि विपक्ष इन्हें प्रचार के हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है।
मिथुन चक्रवर्ती ने बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन को मज़बूत करने और जनता के बीच भाजपा की नीतियों को पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए सिर्फ़ बड़े नेता नहीं, बल्कि बूथ स्तर के कार्यकर्ता असली ताकत होते हैं।

हालांकि, गीत विवाद पर उन्होंने कोई सीधा बयान नहीं दिया। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा अब भी गर्म है कि क्या यह केवल एक संयोग था या किसी की लापरवाही। तृणमूल इस मुद्दे को भाजपा की राजनीतिक गंभीरता पर सवाल उठाने के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा इसे विपक्ष की अनावश्यक बयानबाज़ी बता रही है।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि दुर्गापुर और आसपास के इलाकों में दोनों दलों की प्रतिस्पर्धा पहले से ही तीखी है, और ऐसे विवाद चुनावी रणनीति को और पेचीदा बना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गीत विवाद कितना लंबा खिंचता है और इसका जनमत पर क्या असर पड़ता है।














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