बिजली गुल होने से रानीगंज बंशरा खदान में 18 मजदूर फंसे

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रानीगंज :  रानीगंज के बंशरा कोलियरी में शुक्रवार सुबह एक बड़ी लापरवाही सामने आई, जब अचानक बिजली गुल हो जाने से 18 मजदूर करीब डेढ़ घंटे तक खदान के भीतर फंसे रहे। घटना सुबह 9:20 बजे की बताई जा रही है, जब सी-पिलर के अंदर जा रही पुली अचानक बीच में रुक गई और मजदूर 600 फीट की ऊँचाई पर लटक गए। खदान परिसर में अफरा-तफरी मच गई और मजदूरों के परिजन व स्थानीय लोग दहशत में आ गए।जानकारी के अनुसार, पुली लगभग 50 फीट की गहराई में जा रही थी, तभी अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। जैसे ही बिजली गई, मशीनें रुक गईं और मजदूरों की जान खतरे में पड़ गई। करीब डेढ़ घंटे तक मजदूर उसी स्थिति में लटके रहे।

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सुबह 11 बजे के आसपास बिजली बहाल होने पर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस दौरान मजदूरों की सांसें अटकी रहीं और खदान परिसर में हड़कंप का माहौल रहा।घटना की खबर फैलते ही कोलियरी परिसर में तनाव बढ़ गया। गुस्साए मजदूरों और परिजनों ने अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि ऐसी घटनाएँ यहाँ आम हो चुकी हैं और प्रबंधन मजदूरों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है। मजदूरों का कहना है कि खराब बिजली सेवा और समय-समय पर होने वाली तकनीकी खराबियों के चलते हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है।विरोध कर रहे मजदूरों ने कहा कि यह सिर्फ किस्मत अच्छी थी कि सभी मजदूर सुरक्षित बाहर आ गए। अगर देर होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रबंधन ठोस कदम नहीं उठाएगा और खदानों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन नहीं होगा, तब तक वे चैन से काम नहीं करेंगे।

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इस घटना के बाद से खदान श्रमिकों में गहरा आक्रोश है। मजदूर नेताओं ने कहा कि बिजली आपूर्ति में सुधार और खदानों की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की माँग वे लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने अब तक इस पर ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार की यह घटना उनकी लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का जीता-जागता उदाहरण है।उधर, घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुँची और स्थिति को शांत करने की कोशिश की। अधिकारियों ने मजदूरों को आश्वासन दिया कि मामले की जाँच की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न हों, इसके लिए कदम उठाए जाएँगे।हालाँकि, मजदूरों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की जाती, तब तक मजदूरों की जान हमेशा खतरे में बनी रहेगी।

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