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जितेंद्र तिवारी की मांग : बंगाल के सभी स्कूलों में बांग्ला अनिवार्य

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आसनसोल :  पांडेश्वर के पूर्व विधायक और आसनसोल के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी ने मंगलवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल के सभी विद्यालयों—चाहे वे हिंदी मीडियम, अंग्रेज़ी मीडियम, उर्दू मीडियम या बांग्ला मीडियम हों—में बांग्ला भाषा की पढ़ाई को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

तिवारी ने अपने बयान में कहा “बांग्ला केवल एक भाषा नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, पहचान और अस्मिता का प्रतीक है। जब कोई बच्चा बंगाल की धरती पर पढ़ाई करता है, तो उसका कर्तव्य है कि वह बांग्ला का सम्मान करे और इसे सीखे।”

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उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दिशा में योग्य बांग्ला शिक्षकों की नियुक्ति भी बेहद आवश्यक है। उनका कहना था कि सरकार यदि वास्तव में बांग्ला भाषा को सम्मान देना चाहती है, तो केवल भाषणों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस कदमों से इसे साबित करे।

उन्होंने घोषणा की कि आगामी 1 सितंबर को वे पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को इस मांग से जुड़ा एक विस्तृत पत्र भेजेंगे। इसके बाद 15 दिनों तक सरकार की प्रतिक्रिया का इंतज़ार किया जाएगा। तिवारी ने साफ चेतावनी दी कि अगर इस अवधि में सरकार ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो वे इस मुद्दे को न्यायालय तक लेकर जाएंगे।

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राजनीतिक हलकों में तिवारी का यह बयान सुर्खियाँ बटोर रहा है। समर्थक इसे बंगाल की संस्कृति और भाषा की रक्षा का अभियान मान रहे हैं, जबकि विपक्ष का एक धड़ा इसे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बता रहा है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि तिवारी के इस कदम से बांग्ला समर्थक संगठनों को बल मिलेगा और यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में और गहराई से उभर सकता है।

तिवारी ने अंत में कहा कि उनकी लड़ाई किसी दल या वर्ग के खिलाफ नहीं है। यह केवल बांग्ला भाषा और बंगाल की अस्मिता की रक्षा का प्रयास है। उन्होंने अपील की कि सभी राजनीतिक दल और समाज के लोग इस अभियान में उनका साथ दें।

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