
दुर्गापुर : शनिवार को सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत अस्थायी कंप्यूटर शिक्षकों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया। आईसीटी स्कूल प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2013 से संविदा कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती शुरू हुई थी और अब तक सात चरण पूरे हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में घोषणा की थी कि पहले पाँच चरणों में नियुक्त अस्थायी कंप्यूटर शिक्षक अब सरकार के अधीन लाए जाएंगे। उन्हें वेतन वृद्धि, 60 वर्ष तक सेवा की गारंटी और अन्य लाभ दिए जाएंगे। इस घोषणा से जहाँ शुरुआती चरण के शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ी, वहीं पिछले दो चरणों में नियुक्त लगभग 3700 शिक्षकों की चिंता और बढ़ गई है।
ये शिक्षक पिछले चार वर्षों से विभिन्न स्कूलों में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें न तो सरकारी मान्यता मिली है और न ही स्थायी नौकरी की गारंटी। नतीजतन, वेतन बेहद कम मिलने और भविष्य की असुरक्षा के चलते उनका जीवन कठिनाई में गुजर रहा है। दुर्गापुर के एक स्कूल की कंप्यूटर शिक्षिका शताब्दी मुखर्जी ने बताया कि उन्हें प्रतिमाह 10,000 रुपये से भी कम वेतन मिलता है और काम की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा, “हम लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन बाकी साथियों की तरह हमें भी सरकार के अधीन लाया जाना चाहिए।”

पश्चिम बर्धमान जिले के इन शिक्षकों ने हाल ही में राज्य के दो मंत्रियों, मलय घटक और प्रदीप मजूमदार से भेंटकर अपनी समस्याओं को रखा। लेकिन जब उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो शनिवार को दुर्गापुर से “फिल इन द ब्लैंक” कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। इसमें उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।

स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि वे स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देकर डिजिटल इंडिया के सपनों को साकार करने में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ ही भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि शुरुआती पाँच चरणों के शिक्षकों को सरकारी लाभ मिल सकता है तो अंतिम दो चरणों के शिक्षकों को क्यों नहीं।














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