
कुल्टी : संकतोड़िआ स्थित डिशरगढ़ मार्ग पर भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी तथा स्वर्गीय राजीव गांधी की प्रतिमाओं को खंडित किए जाने की घटना ने क्षेत्र में तीव्र राजनीतिक हलचल उत्पन्न कर दी है। घटना के उजागर होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरासत पर सीधा आघात बताया और आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की आपसी मिलीभगत से यह अमर्यादित कृत्य कराया गया।
प्रतिमाओं के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही युवा कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। उन्होंने विरोध स्वरूप नारे लगाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। उनका कहना था कि यह घटना केवल दो महान नेताओं का अपमान नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र की गरिमा और भारत माता के सपूतों के प्रति असम्मान है।
युवा कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि कुल्टी की धरती पर संगठन अपने आदर्शों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के सम्मान की रक्षा हेतु अंतिम सांस तक संघर्षरत रहेगा। उन्होंने विपक्षी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस की शक्ति को कमजोर समझना भारी भूल सिद्ध होगी।

नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि उनका आंदोलन किसी प्रकार की हिंसा पर आधारित नहीं होगा। वह सत्य, अहिंसा और जनता की लोकतांत्रिक शक्ति पर आधारित जनांदोलन होगा। उद्देश्य संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण का है, न कि राजनीतिक द्वेष का।
घटना से स्थानीय नागरिक भी अत्यंत व्यथित हैं। उनका कहना है कि यह प्रकरण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के नाम पर लोकतांत्रिक धरोहर के साथ खिलवाड़ है। नागरिकों ने सामूहिक स्वर में प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की कि दोषियों की पहचान शीघ्र कर उन्हें कठोर दंड दिया जाए।

इधर, पुलिस प्रशासन ने घटनास्थल पर पहुँचकर प्रतिमाओं की स्थिति का निरीक्षण किया और मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। सूत्रों का कहना है कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है, जिससे शरारती तत्वों की पहचान संभव हो सके।
कुल्टी क्षेत्र की यह घटना केवल प्रतिमाओं के खंडन तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा पर प्रश्नचिह्न है। नागरिक समाज और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि इस विषय पर अब लंबा संघर्ष होगा और यह आंदोलन आगे चलकर राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण विमर्श का विषय बन सकता है।














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