पानी के संकट से भड़के लोग, सरकारी शिविर शुरू होने से पहले ही रद्द

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आसनसोल :  आसनसोल नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 103 अंतर्गत हातिनल गांव में मंगलवार को आयोजित होने वाला ‘आमादेर पाड़ा-आमादेर समाधान’ शिविर उस समय रद्द करना पड़ा, जब स्थानीय लोगों ने पानी की समस्या को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होती, तब तक किसी भी सरकारी कार्यक्रम की जरूरत नहीं है।

सुबह से ही प्रशासनिक टीम शिविर लगाने की तैयारी में जुटी थी, लेकिन जैसे ही अधिकारी और कर्मचारी गांव पहुंचे, ग्रामीणों ने नारेबाज़ी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने “पहले पानी दो, फिर समाधान की बात करो” जैसे नारों से वातावरण गूंजा दिया। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कई महीनों से इलाके में एक बूंद भी नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है।

पेयजल की गंभीर समस्या बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी पाइपलाइन वर्षों से खराब पड़ी है। कुछ इलाकों में पाइप जंग खा चुके हैं, तो कुछ जगहों पर लाइनें टूटकर बंद हो चुकी हैं। जल विभाग के अधिकारियों को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। अब स्थिति यह है कि महिलाएं और बच्चे प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर के कुओं और नालों से पानी ढोने को मजबूर हैं।

स्थानीय निवासी मीना देवी ने कहा — “हमारे घरों में तीन-तीन दिन तक पानी नहीं आता। न पीने को, न नहाने को। जब अधिकारी सिर्फ कागजों में समाधान दिखाते हैं, तो जनता का गुस्सा फूटना ही था।”

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शिविर स्थगित, पुलिस को करनी पड़ी दखलअंदाजी

जैसे-जैसे विरोध बढ़ता गया, मौके पर सांकतोड़िया फांड़ी की पुलिस पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, मगर लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। अंततः प्रशासनिक अधिकारियों को कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा और पूरी टीम शिविर स्थल से लौट गई।

सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम में इलाके की विकास योजनाओं की समीक्षा और लोगों की शिकायतें सुनने की तैयारी थी। मगर जल संकट के चलते पूरा आयोजन विफल हो गया।जनता की तीन प्रमुख मांगें:नियमित जलापूर्ति की गारंटी दी जाए।खराब पाइपलाइन की तुरंत मरम्मत कराई जाए।जब तक स्थायी समाधान न हो, तब तक टैंकर से पानी भेजा जाए।ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उन्हें हर चुनाव से पहले पानी देने के वादे सुनने की आदत हो गई है, लेकिन आज तक किसी ने इस बुनियादी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।

स्थानीय पार्षद का बयान और प्रशासन की सफाई

वार्ड पार्षद ने स्वीकार किया कि इलाके में जल संकट वाकई गंभीर है। उन्होंने कहा, “हमने जल विभाग को लिखित रूप से सूचना दी है। पाइपलाइन की मरम्मत का प्रस्ताव स्वीकृति में है, जल्द काम शुरू होगा।”

वहीं प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इलाके में जल टंकी की क्षमता बढ़ाने की योजना पहले से स्वीकृत है, मगर तकनीकी कारणों से इसमें देरी हो रही है।

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चुनावी असर की संभावना

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पानी की समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो आने वाले नगर निगम चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है। कई ग्रामीणों ने साफ कहा कि इस बार वे उसी प्रतिनिधि को वोट देंगे जो “पानी की समस्या खत्म करने का ठोस वादा करेगा, न कि भाषण देगा।”

गांव की बुजुर्ग निवासी सावित्री देवी ने कहा — “हर साल अधिकारी आते हैं, तस्वीर खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। लेकिन हमारी बाल्टियाँ अब भी खाली हैं। जब तक नल में पानी नहीं आएगा, विश्वास नहीं लौटेगा।”

गांव की आवाज़ प्रशासन तक कब पहुँचेगी?

हातिनल के लोगों का यह प्रदर्शन सरकार और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है कि जब मूलभूत सुविधाएँ नहीं मिलेंगी, तो जनता की नाराज़गी सड़कों पर उतरना तय है। पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत के बिना ‘समाधान शिविर’ का अर्थ ही खो जाता है।

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