
आसनसोल : टैंकरों के माध्यम से वर्षों से पानी आपूर्ति कर रहे ठेकेदार अब आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। शुक्रवार को इन ठेकेदारों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। इस्माइल इलाके स्थित जन स्वास्थ्य अभियंत्रण (पीएचई) विभाग के कार्यालय में दर्जनों ठेकेदारों ने एकजुट होकर बकाया भुगतान की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

करोड़ों रुपये की देनदारी पर ठेकेदारों में रोष
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से विभाग की ओर से उनका भुगतान नहीं किया गया है। बकाया राशि अब करोड़ों रुपये में पहुंच चुकी है। ठेकेदारों ने कहा कि चुनावी अवधि हो या गर्मी के दिन — उन्होंने हमेशा शहर और गांवों में बिना रुकावट पानी की आपूर्ति की है, लेकिन आज वही लोग अपनी मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। एक ठेकेदार ने कहा, “हमने सरकारी आदेश पर दिन-रात पानी पहुंचाया, अब सरकार हमें भूला बैठी है।”

जल जीवन मिशन के तहत भी नहीं मिला भुगतान
कई ठेकेदारों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में नियमित जलापूर्ति की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई थी। इसके बावजूद न तो उनके बिल पास किए जा रहे हैं, न ही विभाग से कोई ठोस जवाब मिल रहा है। भुगतान रुकने के कारण ठेकेदारों पर भारी कर्ज का बोझ बढ़ गया है। वे जिन कंपनियों से पाइप, टैंकर या डीजल खरीदते हैं, उन्हें भी अब बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।
कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी संकट
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सिर्फ ठेकेदार ही नहीं, उनके साथ काम करने वाले मजदूर और ड्राइवर भी बेरोजगारी के कगार पर हैं। कई टैंकर अब बंद पड़े हैं क्योंकि ईंधन और रखरखाव का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। ठेकेदारों ने बताया कि उत्तर बंगाल के कुछ जिलों में बकाया भुगतान न मिलने के कारण कुछ ठेकेदारों ने आत्महत्या तक कर ली। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आसनसोल में भी ऐसी त्रासदी देखने को मिल सकती है।

प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई कि वे तत्काल उनकी समस्या पर संज्ञान लें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान शीघ्र नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से काम बंद कर देंगे। इस दौरान ठेकेदारों ने पीएचई कार्यालय के समक्ष नारेबाजी की और विभागीय अफसरों से तत्काल वार्ता की मांग रखी।
“सरकार वादे निभाए” की उठी पुकार
ठेकेदारों ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार ने समय पर भुगतान करने का आश्वासन दिया था, परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। एक वरिष्ठ ठेकेदार ने कहा, “हम सरकार के सहयोगी हैं, विरोधी नहीं। लेकिन जब पेट पर बन आती है तो आवाज उठाना जरूरी हो जाता है।”आसनसोल के पीएचई ठेकेदारों का यह विरोध अब एक बड़ी चेतावनी बनकर उभरा है। यदि सरकार ने शीघ्र समाधान नहीं किया तो शहर में जलापूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने ठेकेदारों को जल्द बैठक बुलाने का आश्वासन दिया, लेकिन फिलहाल ठेकेदारों का भरोसा टूट चुका है। उनका कहना है — अब हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए।














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