
रानीगंज : देश की सर्वोच्च अदालत के चीफ जस्टिस वी.आर. गोवाई पर जूता फेंके जाने की घटना ने पूरे देश में रोष फैला दिया है। इसी क्रम में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने रानीगंज थाना पहुंचकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। संगठन ने इस कृत्य को ‘लोकतंत्र और न्यायपालिका पर हमला’ बताया और आरोपी अधिवक्ता राकेश किशोर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
भीम आर्मी के सदस्यों ने दोपहर में जुलूस निकालते हुए रानीगंज थाना पहुंचकर इंस्पेक्टर इंचार्ज को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष हुई घटना भारतीय न्याय व्यवस्था पर गहरा आघात है। ऐसे वकील का बार काउंसिल से तत्काल निलंबन और गिरफ्तारी होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति संविधान की गरिमा को चुनौती देने की हिम्मत न करे।
प्रदेश अध्यक्ष सुशील रुईदास ने कहा, “मुख्य न्यायाधीश देश के संविधान के संरक्षक हैं। उन पर जूता फेंकना न केवल असभ्य आचरण है बल्कि लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। यह सिर्फ न्यायपालिका नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा का अपमान है।” उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को रानीगंज पुलिस के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।

देशभर में आक्रोश, लोगों ने जताई नाराज़गी
भीम आर्मी के सदस्यों ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के आचरण का नहीं, बल्कि उन शक्तियों का प्रतीक है जो संविधान के खिलाफ माहौल बनाना चाहती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन राजनीतिक या वैचारिक ताकतों के इशारे पर एक अधिवक्ता ने यह दुस्साहस किया।
संगठन के स्थानीय संयोजक राजकुमार पासवान, विनोद चंद्र, दीपक रुईदास, पप्पू कुमार और रामनाथ मंडल ने कहा कि न्यायपालिका ही वह स्तंभ है जो गरीब, दलित और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है। ऐसे में न्यायाधीशों पर हमले का मतलब है – न्याय की आवाज़ को दबाने की कोशिश करना।

‘संविधान का राज चलेगा, न कि बुलडोजर का’
कार्यकर्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “देश में बुलडोजर का नहीं, संविधान का राज चलेगा।” उनका कहना था कि यह बयान लोकतंत्र की भावना को मजबूत करने वाला था, लेकिन इससे नाराज़ होकर अधिवक्ता राकेश किशोर ने निंदनीय हरकत की।
भीम आर्मी ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का प्रधान न्यायाधीश संविधान के सिद्धांतों की रक्षा करने की बात कर रहा हो, तब उस पर हमला करना दरअसल लोकतंत्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा है।
विरोध से उठा एकजुटता का संदेश
रानीगंज में हुए इस प्रदर्शन में दर्जनों की संख्या में युवा और वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। ज्ञापन के साथ उन्होंने मांग रखी कि केंद्र सरकार इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराए और अधिवक्ता राकेश किशोर के खिलाफ उदाहरण प्रस्तुत करने वाली सजा दे।
कार्यक्रम के अंत में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया और लोकतंत्र की रक्षा की शपथ ली गई।














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