
आसनसोल : आसनसोल के रेलपार क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे बहुचर्चित चिटफंड घोटाले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने रविवार को मुख्य आरोपी तहसीन अहमद को धर दबोचा। आसनसोल उत्तर थाना की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया। सोमवार को आरोपी को आसनसोल न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां पुलिस ने उसकी रिमांड की मांग की ताकि घोटाले से जुड़े अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के ठिकाने से स्वर्णाभूषण, रजत आभूषण तथा नकदी की बड़ी मात्रा जब्त की गई है। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक रूप से बरामदगी के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। जांच दल अब इस पूरे चिटफंड नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने में जुटा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसीन अहमद कई वर्षों से ऊँचे ब्याज और दोगुनी राशि लौटाने के प्रलोभन देकर आम लोगों से धन एकत्र कर रहा था। उसके झांसे में आकर सैकड़ों परिवारों की आजीवन जमा पूंजी डूब गई। पीड़ितों के अनुसार, यह ठगी संगठित रूप से संचालित की जा रही थी, जिसके पीछे कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों का भी हाथ होने की आशंका है।

पुलिस को संदेह है कि तहसीन अहमद के साथ एक संगठित गिरोह सक्रिय था जो स्थानीय व्यवसायियों और राजनीतिक संरक्षण के सहारे इस अवैध धंधे को वर्षों से चला रहा था। सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले की राशि का एक हिस्सा बाहरी राज्यों में निवेश किए जाने की भी संभावना है।
इस बीच, आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल ने मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “राज्य प्रशासन की नाक के नीचे वर्षों तक यह ठगी कैसे चलती रही? जब सैकड़ों लोग ठगे जा रहे थे, तब पुलिस और सरकार मूकदर्शक क्यों बनी रही?” उन्होंने इस घोटाले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि यह कोई साधारण आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि “राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करोड़ों का महाघोटाला” है।

पुलिस का कहना है कि तहसीन अहमद से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण खुलासों की संभावना है। जांच एजेंसियां अब इस प्रकरण के सभी पहलुओं को खंगालने में जुटी हैं।
आसनसोल में हुई यह गिरफ्तारी हाल के वर्षों का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला मानी जा रही है, जिसने न केवल आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति को झकझोर दिया, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।














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