छठ महापर्व की उमंग में डूबा आसनसोल, भक्ति और उल्लास से सराबोर शहर

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आसनसोल :  सूर्योपासना के महापर्व छठ का उत्सव सोमवार से पूरे जोश और श्रद्धा के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर पूरे शहर का माहौल भक्ति, उमंग और उल्लास से सराबोर हो उठा। नदियों, तालाबों और कृत्रिम घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएँ व्रत रखकर संध्या अर्घ्य की तैयारी में जुटीं, वहीं घरों में प्रसाद के रूप में ठेकुआ और फल सजाने की चहल-पहल पूरे दिन बनी रही।

आसनसोल के प्रमुख क्षेत्रों—हीरापुर, कोर्ट मोड़, स्टेशन रोड, बर्नपुर रोड और हटिया मोड़—में भक्तों का सैलाब उमड़ आया। पूजा सामग्री की दुकानों पर लोगों की इतनी भीड़ रही कि पैदल चलने तक की जगह नहीं बची। बाजारों में गन्ना, केला, नारियल, सुपारी, दीपक और बांस की टोकरी की भारी मांग रही। कई स्थानों पर तो दुकानदारों को अतिरिक्त हाथ बँटाने के लिए परिजनों को बुलाना पड़ा।

स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि इस बार गन्ने और नारियल की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है, फिर भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। आसनसोल और आस-पास के ग्रामीण अंचलों से लोग खरीदारी करने शहर पहुँचे। अनेक परिवारों ने बताया कि छठ मइया के पर्व में सामग्रियों के मूल्य का नहीं, बल्कि भाव और आस्था का महत्त्व होता है।

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नगर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की हैं। प्रमुख बाजारों और घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही भीड़ नियंत्रण के लिए नगर निगम कर्मियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की टीम लगातार सक्रिय हैं। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा प्रमुख मार्गों पर यातायात को दिशा बदली गई है। निगम के सफाई विभाग ने घाटों की साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

संध्या समय जब सूर्यास्त के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी आरंभ हुई, तो वातावरण “छठ मइया की जय” के जयघोष से गूंज उठा। घाटों पर दीपों की पंक्तियाँ जल उठीं और आसमान में आस्था की लौ झिलमिलाने लगी। व्रतधारी महिलाएँ परंपरागत वस्त्रों में सुसज्जित होकर, सूप में फल और दीप रखे, जल में खड़ी होकर सूर्य देव को नमन करती रहीं।

इस दौरान श्रद्धालुओं की सहायता के लिए कई सामाजिक संगठन भी सक्रिय रहे। उन्होंने घाटों पर पेयजल, प्राथमिक उपचार और सुरक्षा की सेवाएँ उपलब्ध कराईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के चेहरे पर अपार श्रद्धा और प्रसन्नता झलक रही थी।

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मंगलवार की प्रातःकालीन बेला में श्रद्धालु पुनः घाटों पर एकत्र होंगे और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। इसके साथ ही चार दिनों तक चलने वाला यह लोक आस्था का पर्व संपन्न होगा।

आसनसोल का छठ इस बार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, स्वच्छता और सामूहिक सौहार्द का प्रतीक बनकर उभरा है। हर ओर भक्ति की बयार बह रही है और शहर एक स्वर्णिम आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ प्रतीत हो रहा है।

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