
दुर्गापुर : विधानसभा चुनावों की आहट के बीच पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने नगर निकायों में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में शनिवार को दुर्गापुर नगर निगम (डीएमसी) प्रशासनिक बोर्ड में महत्वपूर्ण फेरबदल किया गया। राज्य शहरी विकास एवं नगर पालिका मामलों के विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अनिंदिता मुखर्जी को एक बार फिर डीएमसी प्रशासक बोर्ड का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। वहीं, धर्मेंद्र यादव को उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो इससे पूर्व बोर्ड के सामान्य सदस्य थे।
इस बदलाव के साथ अमिताभ बनर्जी से उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी वापस लेकर उन्हें सामान्य सदस्य के रूप में रखा गया है। इसके अलावा दीपांकर लाहा और राखी तिवारी को भी बोर्ड सदस्य के रूप में पुनः नियुक्त किया गया है। इसे संगठनात्मक कसावट और चुनावी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

तीन वर्ष से चुनाव लंबित, प्रशासनिक बोर्ड चला रहा कामकाज
सितंबर 2022 में निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से दुर्गापुर नगर निगम में चुनाव नहीं हुए हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने प्रशासक बोर्ड के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को संचालित किया है। विपक्षी दल लगातार चुनाव कराने की मांग उठाते रहे हैं। कई बार प्रदर्शन हुए, ज्ञापन सौंपे गए और अदालत में भी आवाज उठाई गई, लेकिन चुनाव अब तक नहीं हो सके। सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक और कानूनी कारणों से प्रक्रिया लंबित है।

धर्मेंद्र यादव का कद बढ़ा, संगठन में बढ़ती पकड़ का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार तृणमूल ने धर्मेंद्र यादव को दिए गए इस दायित्व के जरिए संगठनात्मक समीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व, दोनों पर ध्यान दिया है। धर्मेंद्र यादव को हिंदीभाषी समुदाय में प्रभावी चेहरा माना जाता है। उनके पास निगम के प्रशासनिक अनुभव का लंबा रिकॉर्ड रहा है, जिसमें बोरो चेयरमैन और एमएमआईसी के रूप में कार्यकाल शामिल है। हाल ही में उन्हें दुर्गापुर तृणमूल कांग्रेस के तीसरे ब्लॉक का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था।
सादगीपूर्ण छवि, विवाद-मुक्त कार्यशैली और संगठन के प्रति निष्ठा ने पार्टी में उनका कद बढ़ाया है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों में पार्टी हिंदीभाषी वोटबैंक को सुदृढ़ करना चाहती है, जिसके लिए धर्मेंद्र की भूमिका अहम हो सकती है।
अभिषेक बनर्जी का निर्देश, त्वरित कार्यान्वयन
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि चुनावी तैयारियों को देखते हुए पूरे राज्य के नगर निकायों में नेतृत्व संरचना में बदलाव किए जाएंगे। दुर्गापुर में हुआ यह बदलाव उसी रणनीति का हिस्सा है। यह कदम संगठन की सक्रियता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने की मंशा के रूप में देखा जा रहा है।

विकास और पारदर्शिता की राह पर उम्मीदें
नई नियुक्ति के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में कई उम्मीदें बंधी हैं। नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नगर निगम कार्यों की गति प्रभावित हुई है और नई टीम से उम्मीद है कि विकास कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही नागरिक सुविधाओं के विस्तार, जल निकासी सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और सफाई व्यवस्था को व्यवस्थित करने की जरूरत है।
विशेष रूप से औद्योगिक और बहुभाषी जनसंख्या वाले दुर्गापुर में प्रशासनिक प्रभावशीलता और सार्वजनिक संवाद महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में नई टीम के सामने जनविश्वास कायम रखने और चुनाव के पूर्व माहौल को शांत व विकासोन्मुख रखने की चुनौती रहेगी।
विपक्ष की नजर और जनता की अपेक्षाएं
विपक्षी दल इस फेरबदल को चुनावी दबाव का परिणाम बता रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार चुनाव कराने से बच रही है और प्रशासनिक बोर्ड की आड़ में राजनीतिक नियंत्रण बनाए हुए है। वहीं नागरिकों का एक बड़ा वर्ग कहता है कि नेताओं का बदलाव महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि कार्यों की गति और पारदर्शिता जरूरी है।
दुर्गापुर में हुए इस महत्वपूर्ण निर्णय ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। अब देखने वाली बात यह है कि नई टीम नागरिक अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है और आने वाले महीनों में डीएमसी क्षेत्र में विकास और प्रशासनिक सुधारों की तस्वीर कैसी बनती है।














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