
कुल्टी (आसनसोल) : सोशल मीडिया यूग में फर्जी कंटेंट और डिजिटल दुष्प्रचार का असर अब राजनीति के मैदान में खुलकर दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में कुल्टी थाना क्षेत्र के नीचुग्राम इलाके में एक महिला की कथित बंदूक वाली तस्वीर ने राजनीतिक पारा बढ़ा दिया। मामला सामने आते ही तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समर्थक आमने-सामने आ गए।
तृणमूल कांग्रेस समर्थक राजू खान ने कुल्टी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि भाजपा अल्पसंख्यक नेता जीशान कुरैशी ने दुर्भावनापूर्ण मंशा से उनकी पत्नी की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से एक एडिटेड और एआई-निर्मित तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिसमें महिला को हाथ में बंदूक लेकर खड़ा दिखाया गया है। शिकायत में लिखा गया है कि जैसे ही यह तस्वीर वायरल हुई, परिचितों और रिश्तेदारों की लगातार कॉल आने लगीं और परिवार मानसिक तनाव में आ गया। राजू खान का कहना है कि बेबुनियाद बदनामी ने परिवार को नैराश्य की स्थिति में धकेल दिया है।

राजू खान ने कहा कि यह घटना उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला है और इस तरह की प्रवृत्ति से समाज में आपसी अविश्वास बढ़ता है। उन्होंने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर डिजिटल माध्यम से प्रहार न हो सके।
भाजपा नेता का पक्ष
भाजपा नेता जीशान कुरैशी ने स्वीकार किया कि तस्वीर उन्होंने ही सोशल मीडिया पर साझा की थी, लेकिन उनका दावा है कि उनके मन में किसी को बदनाम करने की मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि तस्वीर उन्हें किसी अन्य स्रोत से प्राप्त हुई और उन्होंने पुलिस से भी अनुरोध किया है कि जांच करे कि बंदूक असली है, खिलौना है या तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है। जीशान कुरैशी ने यह भी कहा कि उनका राजू खान से व्यक्तिगत कोई विवाद नहीं है, इसलिए बदले की कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता।
राजनीतिक जंग में नया विवाद
विवाद के बीच भाजपा के यूथ लीडर अमित यादव का नाम भी चर्चा में आ गया है। हालांकि उन्होंने स्वयं को इस मामले से अलग बताते हुए कहा कि उनका काम जनता की सेवा करना है और राजनीतिक साजिशों से वे डरने वाले नहीं। उन्होंने कहा कि जनता सच समझती है और गलत आरोपों से उनकी छवि प्रभावित नहीं होगी।

खिलौना बंदूक होने का दावा
स्थानीय सूत्रों और परिवार के सदस्यों के अनुसार, फोटो में जो बंदूक नजर आ रही है, वह असल में एक लाइटरनुमा खिलौना है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर सोशल मीडिया वीडियो या रील बनाने के लिए किया जाता है। परिजनों का कहना है कि बिना पुष्टि के फोटो वायरल करना गलत कदम है और इससे घर की महिलाओं और बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
पुलिस की जांच जारी
फिलहाल कुल्टी थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस यह भी परख रही है कि तस्वीर असली है, संपादित है या एआई जनरेटेड। ज्ञात हो कि एआई आधारित तस्वीरों और वीडियो के ज़रिए फर्जीवाड़ा और बदनाम करने की घटनाएं पिछले कुछ समय से बढ़ी हैं, जिससे राजनीतिक और सामाजिक जगत में गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सूचना के इस दौर में सत्यापन से पहले सामग्री साझा करना गंभीर परिणाम ला सकता है। कुल्टी का यह मामला भी डिजिटल नैतिकता और सोशल मीडिया जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। 앞으로 जांच के निष्कर्ष से यह तय होगा कि मामला महज गलतफहमी है या सोची-समझी राजनीतिक चाल।














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