
आसनसोल : सोमवार को आसनसोल के कालीपहाड़ी स्थित एजेंट पाड़ा क्षेत्र में अवैध खनन की आशंका को लेकर स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही इलाके में तनाव का माहौल रहा, जब कुछ लोगों को कथित रूप से जमीन खोदते और खदान जैसा ढांचा तैयार करते देखा गया। देखते ही देखते गांव के दर्जनों निवासी मौके पर पहुँच गए और कथित निर्माण कार्य रुकवाते हुए ज़बरदस्त नाराज़गी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सारा काम चोरी-छिपे और बिना किसी सरकारी अनुमति के किया जा रहा था।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, उषाग्राम क्षेत्र का एक व्यक्ति, जिसे लोग ‘पंडित’ के नाम से जानते हैं, इस पूरी गतिविधि के पीछे बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि यह व्यक्ति लंबे समय से इलाके के विभिन्न हिस्सों में अवैध खनन कराने की कोशिश करता रहा है। इस बार जब इलाके में नई गतिविधि दिखी, तो लोगों ने सतर्कता दिखाते हुए इसे समय रहते रोक दिया।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि यह अवैध खदान शुरू हो जाता, तो उनके घरों की नींव कमजोर हो जाती और भारी विस्फोटक गतिविधियाँ होने से किसी भी समय जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था। स्थानीय लोगों ने कहा कि कोयले की अवैध खुदाई चलते-चलते कई बस्तियाँ धंस चुकी हैं, जिन्हें वे प्रत्यक्ष रूप से पिछले वर्षों में देख चुके हैं। इसलिए इस बार वे चुप नहीं बैठना चाहते थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विकास के नाम पर अवैध खनन और दबंगई को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। गांव में रहने वाले बुजुर्गों और महिलाओं ने भी खुलकर विरोध में भाग लिया। सभी का एक ही कहना था — “हमारी जमीन, हमारा घर और हमारा जीवन किसी अवैध धंधे की भेंट नहीं चढ़ सकता।” कई लोगों ने यह भी बताया कि यदि प्रशासन समय रहते कदम नहीं उठाएगा, तो इलाके में हालात और बिगड़ सकते हैं।
मौके पर मौजूद एक मजदूर ने स्वीकार किया कि वह यहां खदान निर्माण के उद्देश्य से ही आया था। उसने खुलकर बताया कि यह कार्य अवैध है और उसे ‘पंडित’ नामक व्यक्ति ने काम दिलवाया है। मजदूर ने अपनी मजबूरी जताते हुए कहा कि रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण वह इस काम को करने के लिए विवश हो गया। उसकी बातों से यह स्पष्ट हुआ कि गरीबी और काम की कमी का फायदा उठाकर कुछ लोग अवैध काम करवाते हैं।
घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी दे दी गई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक प्रशासनिक टीम मौके पर नहीं पहुँची थी। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक अधिकारी स्थल निरीक्षण कर उचित कदम नहीं उठाते, वे लगातार निगरानी रखेंगे ताकि कोई फिर से निर्माण शुरू न कर सके।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कोयले की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के दावे कितने प्रभावी हैं। इलाके में पहले भी कई बार ऐसे प्रयास सामने आए हैं और हर बार जनता को ही आगे आकर व्यवस्था संभालनी पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन को जागना चाहिए और ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति या गिरोह अवैध खनन के बारे में सोचने की भी हिम्मत न करे।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए और इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर नियमित निगरानी रखी जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे और आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी लोगों के समर्थन में आगे आने की बात कही है, जिससे यह संघर्ष केवल एक बस्ती का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का सामूहिक प्रयास बन सके। सोमवार का यह विरोध प्रदर्शन केवल एक घटना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा, आजीविका और अस्तित्व की लड़ाई का प्रतीक बन गया है।














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