
कुल्टी (आसनसोल) : मेहनत, लगन और संघर्ष की मिसाल पेश करते हुए सीतारामपुर विश्वकर्मा नगर के एक साधारण फेरीवाले के बेटे ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी परीक्षा पास कर इलाके का नाम रोशन कर दिया है। गुरुवार को जब इस उपलब्धि की खबर पूरे क्षेत्र में फैली, तो मोहल्ले में बधाइयों और मिठाइयों का दौर शुरू हो गया। हर कोई कह रहा था — “देखो, मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।”
यह कहानी है फेरीवाले दुर्गेश प्रसाद और उनकी पत्नी माया देवी की, जिन्होंने तमाम आर्थिक मुश्किलों के बावजूद अपने बेटे आदर्श प्रसाद को पढ़ाई से कभी दूर नहीं होने दिया। दुर्गेश रोज़ सुबह एक बड़ा बैग लेकर झारखंड के धनबाद, चंदनकियारी, चास और स्थानीय बाज़ारों में फेरी लगाते थे। कभी बारिश तो कभी तेज़ धूप, लेकिन उन्होंने अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए एक पल भी पीछे नहीं हटे।

बरसाती पानी टपकता रहा, पर उम्मीद नहीं टूटी
आदर्श के घर की छत से बरसात में पानी टपकता था। दीवारों पर सीलन और कमरे में अंधेरा — पर यही अंधेरा उसकी ज़िंदगी की रोशनी बन गया। आदर्श ने बताया, “अक्सर बिजली कट जाती थी, तो मैं सड़क किनारे लगी स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई करता था। पिता की मेहनत देखकर हमेशा लगता था कि मुझे कुछ बड़ा करना है ताकि उनकी मेहनत रंग लाए।”
मां की आंखों में खुशी के आंसू, पिता का सीना गर्व से चौड़ा
आदर्श के पिता दुर्गेश प्रसाद ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा इतना बड़ा मुकाम हासिल करेगा। हम तो बस चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर इज़्जत की नौकरी करे। आज उसने पूरे परिवार को गर्व का एहसास कराया है।”
मां माया देवी की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास पैसे नहीं थे, लेकिन हौसला था। कभी किसी से उधार लेकर किताबें खरीदीं, कभी पुराने कपड़ों के बदले कॉपी ली। आज जब बेटा CA बना है, तो लगता है भगवान ने हमारी मेहनत सुन ली।”
इलाके में खुशी की लहर, युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
आदर्श के इस परिणाम के बाद पूरे सीतारामपुर विश्वकर्मा नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। पड़ोसी, रिश्तेदार और स्थानीय लोग मिठाई लेकर पहुंचे। इलाके के लोगों ने कहा कि आदर्श की कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है। स्थानीय निवासी राजकुमार झा ने कहा, “आज के बच्चे अक्सर हालात देखकर हार मान लेते हैं, लेकिन आदर्श ने दिखा दिया कि जज़्बा हो तो हर मुश्किल आसान है।”
3 नवंबर को घोषित हुआ था परीक्षा परिणाम
3 नवंबर की शाम जब CA परीक्षा के परिणाम घोषित हुए, तो आदर्श ने अपनी आंखों पर यकीन नहीं किया। रिज़ल्ट देखते ही उसकी मां मंदिर में जाकर दिया जलाने लगीं और पिता ने फेरी का बैग एक तरफ रख दिया — उनके लिए यह दिन किसी त्यौहार से कम नहीं था।
अब परिवार के अन्य बच्चे भी कर रहे उच्च शिक्षा
दुर्गेश प्रसाद के दो और बच्चे — एक बेटा और एक बेटी — वर्तमान में कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पिता ने कहा कि आदर्श की सफलता ने अब छोटे बच्चों में भी पढ़ाई के प्रति नई ऊर्जा भर दी है।

“मेरे पिता मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं” – आदर्श
आदर्श ने कहा, “जब कभी थक जाता था, तो पिता को फेरी लगाते देख सोचता था — अगर वह इतनी मेहनत कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं। यही सोच मुझे आगे बढ़ाती रही। मैं यह सफलता अपने माता-पिता को समर्पित करता हूं।”
गरीबी में जन्मी एक बड़ी कहानी
आदर्श की यह कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष में पली उम्मीद की कहानी है। एक साधारण घर से निकले इस युवक ने यह साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति की परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उसका हौसला उसके भविष्य का निर्धारण करता है।
आज सीतारामपुर की गलियों में हर कोई उसी एक नाम की चर्चा कर रहा है — “आदर्श प्रसाद — जिसने गरीबी को मात देकर सपनों को साकार कर दिखाया।”














Users Today : 6
Users Yesterday : 30