
आसनसोल: रविवार को आसनसोल में देश के कई राज्यों में फैले एक बड़े ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। ट्रांसमीटो डेवलपमेंट फाउंडेशन और सपोर्ट इंडिया फाउंडेशन नामक संगठनों के माध्यम से सैकड़ों महिलाओं से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपियों में मोहम्मद नदिम, शाकिर अली, फैयाज, विजय पंडित और राजबल्लभ चौहान जैसे नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, यह गिरोह छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश समेत 14 राज्यों में सक्रिय था। यह संगठन ‘विकास परियोजनाओं’ और ‘सामाजिक कल्याण योजनाओं’ के नाम पर महिलाओं को निवेश का लालच देकर पैसे वसूलते थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान लगाया गया है।
रविवार को पीड़ित महिलाएं विभिन्न राज्यों से आसनसोल पहुंचीं और भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल के नेतृत्व में दक्षिण थाना में विरोध प्रदर्शन किया। महिलाओं ने ठगी करने वालों की गिरफ्तारी की मांग की और पुलिस से लिखित शिकायत दर्ज कराई। विधायक पॉल ने इस अवसर पर कहा,
“हमने पुलिस प्रशासन को सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो हम आसनसोल में व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज की महिलाओं के साथ हुआ अमानवीय अन्याय है।”

छत्तीसगढ़ की शबनम परवीन, जो इस घोटाले की प्रमुख पीड़िता हैं, ने बताया कि उन्होंने मोहम्मद नदिम और उसके सहयोगियों के झांसे में आकर लाखों रुपये निवेश किए। उन्होंने कहा, “हमें बताया गया था कि यह कंपनी सामाजिक विकास योजनाओं के लिए काम करती है और निवेश पर मोटा लाभ मिलेगा। लेकिन कुछ महीनों बाद कंपनी का ऑफिस बंद मिला और सभी लोग फरार हो गए।”
झारखंड से आई सोनम देवी ने भी अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि कंपनी ने उन्हें ब्लॉक स्तर पर कार्य का जिम्मा देने के साथ सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा, “हमने विश्वास किया, मेहनत की, पैसे लगाए — लेकिन अब सब कुछ खो दिया। अब हमारे ही गांव के लोग हमें धोखेबाज कह रहे हैं।”
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ट्रांसमीटो डेवलपमेंट फाउंडेशन और सपोर्ट इंडिया फाउंडेशन का मुख्य कार्यालय आसनसोल के जुबली इलाके में स्थित था। वहां फिलहाल ताला लटका हुआ है और किसी कर्मचारी का पता नहीं है। पुलिस को संदेह है कि कंपनी के संचालक पिछले पांच महीनों से फरार हैं और विदेश भागने की फिराक में हैं।
बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों से मांग की है कि इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। उन्होंने कहा, “यह कोई सामान्य आर्थिक अपराध नहीं है। यहां गरीब महिलाओं की आजीविका और सम्मान दोनों से खिलवाड़ हुआ है। ऐसी घटनाओं को जड़ से खत्म करने के लिए कठोर कार्रवाई जरूरी है।”
इस बीच, स्थानीय निवासियों ने भी दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और निवेशकों के पैसे की वापसी की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ता संदीप घोष ने कहा, “इस ठगी ने आसनसोल की छवि को धूमिल किया है। यह आवश्यक है कि पुलिस जल्द से जल्द बैंक खातों की जांच कर दोषियों को सजा दिलाए।”

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और कुछ बैंक लेनदेन रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि आसनसोल के अलावा दुर्गापुर और कोलकाता में भी इस कंपनी के नेटवर्क के प्रमाण मिले हैं।
वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक साजिश और महिला ठगी जैसे कई संगीन धाराओं में मामला दर्ज होगा।
आसनसोल में यह मामला न केवल आर्थिक अपराध का उदाहरण बन गया है, बल्कि यह इस बात की भी चेतावनी है कि कैसे ‘विकास’ और ‘सेवा’ के नाम पर भोले-भाले लोगों से करोड़ों रुपये लूटे जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और क्या पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल पाएगा या नहीं।














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