
दुर्गापुर : सोमवार को दुर्गापुर नगर निगम द्वारा चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान अचानक तनाव में बदल गया, जब स्थानीय लोगों ने निगम अधिकारियों और पुलिस टीम का घेराव कर दिया। घटना वार्ड नंबर 32 के पियाला क्षेत्र की है, जहाँ नगर निगम ने अपनी जमीन से अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। अभियान शुरू होते ही कई स्थानीय लोग मौके पर पहुँच गए और विरोध जताने लगे।
नगर निगम की टीम सुबह लगभग 10 बजे भारी पुलिस बल के साथ पियाला पहुंची। निगम अधिकारियों ने पहले से नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट किया था कि संबंधित जमीन निगम की है और उस पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बनाया गया है। नोटिस में कहा गया था कि निर्धारित तिथि तक निर्माण हटाया जाए, अन्यथा निगम खुद कार्रवाई करेगा। लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके बाद सोमवार को निगम टीम मौके पर पहुंची।

हालांकि जैसे ही जेसीबी मशीनों ने निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की, कब्जाधारक प्रताप पाल और उनके परिजनों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि “यह जमीन मेरी पैतृक संपत्ति है और इस पर नगर निगम का कोई अधिकार नहीं है।” देखते ही देखते आसपास के लोग भी एकत्र हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। निगम अधिकारियों और विरोध कर रहे लोगों के बीच बहस इतनी बढ़ी कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख कोक ओवन थाने से अतिरिक्त पुलिस बल और कॉम्बैट टीम को बुलाया गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए समझाइश का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोगों के उग्र होने पर हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसी दौरान सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया।
घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और महिलाएँ अपने घरों में चली गईं। इलाके में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पियाला क्षेत्र की यह जमीन निगम की संपत्ति के रूप में दर्ज है और उस पर अवैध निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा, “हमारे पास संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। इस भूमि पर कब्जा हटाने का निर्णय प्रशासनिक बैठक में लिया गया था। नोटिस जारी करने के बावजूद जब निर्माण नहीं हटाया गया, तब कार्रवाई करनी पड़ी।”
दूसरी ओर, प्रताप पाल का कहना है कि निगम प्रशासन बिना पूरी जांच किए कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा, “मैं कई वर्षों से इस जमीन पर रह रहा हूँ। बिजली, पानी और टैक्स के बिल मेरे नाम पर हैं। अब अचानक निगम कह रहा है कि यह जमीन उसकी है। अगर ऐसा है तो अदालत में सबूत पेश करे।”
इस बीच इलाके में कई स्थानीय लोगों ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चुनाव पूर्व राजनीति से प्रेरित है, जबकि अन्य का मानना है कि नगर निगम को पहले विवादित जमीन के स्वामित्व की कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
वहीं, दुर्गापुर नगर निगम के प्रशासक बोर्ड की ओर से कहा गया है कि शहर में अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। “निगम की भूमि पर कोई भी अवैध कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा, चाहे वह किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का क्यों न हो,” निगम के प्रवक्ता ने कहा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती जारी है ताकि किसी भी प्रकार की पुनः गड़बड़ी न हो। पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है और वीडियो फुटेज की मदद से अन्य उपद्रवियों की पहचान भी की जा रही है।
स्थानीय निवासी सुधांशु तिवारी ने कहा कि “सरकारी जमीन को मुक्त कराना सही कदम है, लेकिन इसे पारदर्शी तरीके से करना चाहिए। अचानक बुलडोजर चलाने से जनता में असंतोष फैलता है।” वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि “कब्जाधारकों के कारण शहर के विकास कार्य अटक जाते हैं, इसलिए निगम का यह अभियान जारी रहना चाहिए।”
घटना के बाद शाम तक पियाला क्षेत्र में पुलिस गश्त जारी रही और निगम के अधिकारी मौके की स्थिति पर नजर रखे हुए थे। पूरे घटनाक्रम ने दुर्गापुर में अवैध निर्माण और भूमि विवाद के पुराने मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।














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