नंबर प्लेट बदलकर चोरी छिपाने की कोशिश नाकाम, दो युवक गिरफ्तार

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दुर्गापुर :  दुर्गापुर में पुलिस की सतर्कता के आगे अपराधियों की चाल एक बार फिर नाकाम साबित हुई। सिटी सेंटर थाना क्षेत्र में चोरी की गई मोटरसाइकिल का नंबर प्लेट बदलकर फरार होने की कोशिश कर रहे दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को गहन पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जबकि चोरी की गई बाइक भी पुलिस ने बरामद कर ली है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना कुछ दिन पहले की है जब सिटी सेंटर स्थित गांधी मोड़ के पास एक निजी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सामने से एक मोटरसाइकिल रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। बाइक के मालिक ने तत्काल सिटी सेंटर पुलिस फांड़ी में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच में तेजी लाई और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।

सीसीटीवी में दो संदिग्ध युवकों को बाइक के साथ जाते हुए देखा गया, जिसके आधार पर पुलिस ने दोनों की पहचान की और निगरानी शुरू की। तकनीकी जांच और स्थानीय सूत्रों की मदद से पुलिस ने दोनों के ठिकानों का पता लगाया और 8 नवंबर को अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजेश मंडल उर्फ लेबू और लक्ष्मी साहनी के रूप में हुई है। राजेश मंडल को बाँकुड़ा जिले से पकड़ा गया, जबकि लक्ष्मी साहनी को बोलपुर के कैनाल पार क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान दोनों ने बाइक चोरी की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि चोरी के बाद पुलिस की पकड़ से बचने के लिए उन्होंने बाइक का नंबर प्लेट बदल दिया था और कुछ हिस्सों को रंग-रूप बदलने की कोशिश भी की थी, ताकि पहचान कठिन हो जाए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपी पेशेवर चोर हैं और इससे पहले भी ऐसे कई मामलों में शामिल रहे हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इन दोनों का किसी बड़े गिरोह से संबंध है या वे स्वतंत्र रूप से चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की गई बाइक को कहाँ बेचने या उपयोग करने की योजना थी।

सिटी सेंटर पुलिस फांड़ी के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि पुलिस की टीम ने आधुनिक तकनीक और सतर्क जांच के जरिए यह सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि अपराधियों द्वारा नंबर प्लेट बदलने जैसी चालें अब पुलिस की पैनी नजर से नहीं बच सकतीं। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से भी अपील की कि यदि किसी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति को देखें तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि अपराधों पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

इस पूरे अभियान में सब-इंस्पेक्टर संतोष राणा, हेड कांस्टेबल देबाशीष मोंडल और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने लगातार कई दिनों तक निगरानी रखी और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपियों तक पहुँचे। पुलिस ने बताया कि बरामद की गई बाइक को उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद उसके वास्तविक मालिक को सौंप दिया जाएगा।

दुर्गापुर पुलिस ने इस घटना के बाद क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। शहर के भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की जांच नियमित रूप से की जा रही है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता की सराहना की है। गांधी मोड़ क्षेत्र के एक निवासी संतोष घोष ने कहा, “पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने दिखा दिया कि अपराधी चाहे जितनी चालाकी दिखाएँ, कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं।”

वहीं, पुलिस ने चेतावनी दी है कि वाहन चोरी के मामलों में शामिल अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की आपराधिक गतिविधियाँ न केवल संपत्ति की हानि हैं, बल्कि समाज में असुरक्षा की भावना भी फैलाती हैं। इसलिए पुलिस ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाएगी।

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को गुरुवार को दुर्गापुर महकमा अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने अदालत को बताया कि आगे की जांच में अन्य चोरियों के संबंध में भी इनसे पूछताछ की जाएगी।

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जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह मामला केवल एक साधारण बाइक चोरी का नहीं, बल्कि संगठित अपराध के जाल से जुड़ा हो सकता है। इस दिशा में पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से दोनों आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड्स और संपर्कों की जांच शुरू कर दी है।

इस घटना के बाद दुर्गापुर में बाइक मालिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कहा है कि सभी वाहन मालिक अपने वाहनों में एंटी-थेफ्ट डिवाइस और GPS ट्रैकर लगाने पर विचार करें, जिससे चोरी की स्थिति में उन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सके।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए “ऑपरेशन सेफ व्हील” नामक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत संदिग्ध वाहनों की जांच और रात्रि गश्त को और मजबूत किया जाएगा।

पुलिस की यह सफलता न केवल अपराध नियंत्रण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि आधुनिक तकनीक और जन-सहयोग से अपराधियों का बच पाना अब लगभग असंभव है।

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