
रानीगंज : औद्योगिक नगरी रानीगंज में गुरुवार को यूनियन बैंक की शाखा में हुई एक बड़ी लापरवाही ने वित्तीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की प्रतिष्ठित थोक मंडी के बीच स्थित इस बैंक में दो व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लाखों रुपये फर्जी आरटीजीएस के जरिये किसी अन्य खाते में ट्रांसफर होने से बाल-बाल बच गए। घटना का खुलासा तब हुआ जब एक व्यापारी का कर्मचारी संयोगवश उसी दिन दोपहर बाद बैंक पहुंचा और बातचीत के दौरान शक होने पर जांच शुरू की गई।
जानकारी के अनुसार, सोमवार को दो प्रतिष्ठानों ने यूनियन बैंक, रानीगंज शाखा में आरटीजीएस फार्म और चेक जमा किए थे। लेकिन किसी अज्ञात व्यक्ति ने इन फार्मों से छेड़छाड़ कर लाभार्थियों के नाम और खाता नंबर बदल दिए थे। सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति बैंक में कई दिनों से ग्राहकों की गतिविधियों को देख रहा था और मौका मिलते ही फार्म उठा लिया। सीसीटीवी फुटेज की जांच में यह व्यक्ति साफ नजर आ रहा है, जिसकी उम्र लगभग 45 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
बैंक सूत्रों ने बताया कि आरोपी ने हुगली जिले के एसबीआई बैंक में अपने व्यक्तिगत खाते में फर्जी तरीके से चारों आरटीजीएस की रकम ट्रांसफर कर ली थी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने बड़ी चालाकी से फार्म के केवल हस्ताक्षर वाले हिस्से को सुरक्षित रखते हुए ऊपर का भाग बदल दिया था, जिससे यह पहली नजर में सही प्रतीत हो। हालांकि बैंक के सतर्क कर्मचारियों ने समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली और ट्रांजैक्शन रोक दिया, जिससे दो व्यापारिक प्रतिष्ठान भारी नुकसान से बच गए।

बैंक के चीफ मैनेजर उदय कुमार पांडेय ने कहा कि यह घटना बैंक की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा सबक है। उन्होंने बताया कि “घटना से दो दिन पहले ही कर्मचारियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे, फिर भी यह चूक हो गई। हमने सीसीटीवी फुटेज मुख्यालय को भेज दी है और अनुमति मिलते ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।”
पांडेय ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक नियमों के अनुसार किसी उपभोक्ता या तीसरे पक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पहले क्षेत्रीय कार्यालय की अनुमति लेना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि हेड ऑफिस को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है और उनके निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने रानीगंज के व्यापारिक समुदाय में चिंता पैदा कर दी है। रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रोहित खेतान ने कहा कि “यह बैंक की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। सौभाग्य से बैंक की तत्परता से हम बड़ी हानि से बच गए, परंतु यह संकेत है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि रानीगंज जैसे बड़े व्यापारिक केंद्र में रोजाना करोड़ों का लेनदेन होता है, ऐसे में बैंकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी बाहरी व्यक्ति को बैंक परिसर में अधिक देर तक रुकने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और आरटीजीएस जैसे संवेदनशील दस्तावेजों के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
बैंक सूत्रों के अनुसार, आरोपी का नाम लक्ष्मीकांत टुडू बताया गया है, जो हुगली का निवासी है। वह काफी दिनों से बैंक में आता-जाता दिखाई देता था और संभवतः किसी ग्राहक के रूप में खुद को प्रस्तुत करता था। बैंक अधिकारियों ने उसके फोटो और फुटेज स्थानीय पुलिस को सौंप दिए हैं ताकि जल्द उसकी गिरफ्तारी हो सके।
रानीगंज के नागरिकों और व्यापारियों ने इस घटना के बाद बैंक प्रबंधन से कड़ी निगरानी और ग्राहक सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की है। फिलहाल, बैंक की तत्परता से यह बड़ा आर्थिक फर्जीवाड़ा टल गया, लेकिन घटना ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल और दस्तावेज़ीय सुरक्षा में थोड़ी सी ढिलाई भी लाखों का नुकसान कर सकती है।














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