
दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और तेजी लाने की दिशा में एक और सराहनीय पहल की। राज्य सरकार ने ‘यात्री साथी’ मोबाइल ऐप के माध्यम से नई एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ किया, जिसकी शुरुआत पश्चिम बर्धमान जिले से की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य आम लोगों को त्वरित, सुलभ और पारदर्शी एम्बुलेंस सुविधा प्रदान करना है, जिससे उन्हें किसी भी आपातकालीन स्थिति में दलालों और बिचौलियों के चंगुल में न फंसना पड़े।
पहले जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परिवारों को निजी एम्बुलेंस चालकों या दलालों को हजारों रुपये देने पड़ते थे, वहीं अब “यात्री साथी” ऐप के जरिये लोग एक क्लिक पर सरकारी दरों पर एम्बुलेंस बुक कर सकेंगे। यह ऐप राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किया गया है, जिसे सीधे पुलिस और जिला प्रशासन से जोड़ा गया है ताकि हर कॉल का त्वरित रिस्पॉन्स हो सके।
पश्चिम बर्धमान में इस सेवा के पहले चरण में आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के अधीन कुल 170 एम्बुलेंस को इस ऐप से जोड़ा गया है। ये सभी एम्बुलेंस आधुनिक जीपीएस प्रणाली से लैस हैं, जिससे उनकी लोकेशन और सफर की निगरानी वास्तविक समय में की जा सकती है।

गुरुवार सुबह से ही इस नई सेवा के संचालन में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह सक्रिय दिखे। दुर्गापुर के विभिन्न अस्पतालों और ट्रैफिक कंट्रोल रूम में अधिकारियों ने नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की निगरानी की ताकि किसी तकनीकी समस्या के कारण देरी न हो।
आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के एसीपी ट्रैफिक राजकुमार मालाकार ने बताया कि राज्य सरकार ने इस सेवा के माध्यम से एक मानवीय पहल की है। उन्होंने कहा, “अब मरीजों के परिवारों को एम्बुलेंस ढूंढने के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। ‘यात्री साथी’ ऐप के जरिए वे कुछ ही मिनटों में अस्पताल से जुड़ी अधिकृत एम्बुलेंस अपने घर या दुर्घटनास्थल पर बुला सकते हैं। इससे दलालों का जाल खत्म होगा और लोगों को राहत मिलेगी।”
इस ऐप की खासियत यह है कि यह न केवल एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराता है बल्कि बुकिंग के समय ही किराया और रूट की जानकारी भी देता है। इससे मरीजों के परिजनों को पहले से पता रहता है कि उन्हें कितनी राशि का भुगतान करना होगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस ऐप को पूरे राज्य में लागू करने की योजना है। स्वास्थ्य विभाग इसे आपदा प्रबंधन और पुलिस कंट्रोल रूम से भी जोड़ने पर विचार कर रहा है ताकि सड़क दुर्घटनाओं, प्रसवकालीन आपात स्थितियों या आकस्मिक बीमारियों के मामलों में तेजी से एम्बुलेंस भेजी जा सके।
स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना की है। दुर्गापुर के निवासी सुभाष दे ने कहा, “पहले हमें निजी एम्बुलेंस के लिए तीन से चार हजार रुपये तक देने पड़ते थे। अब अगर सरकार यह सेवा सस्ती और भरोसेमंद दरों पर दे रही है तो यह जनता के लिए बड़ी राहत है।”
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हर एम्बुलेंस चालक और परिचालक को सेवा शुरू करने से पहले डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे ऐप से प्राप्त बुकिंग को सही समय पर पूरा कर सकें।
इस परियोजना के तहत जिला प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हर अस्पताल में ‘यात्री साथी हेल्प डेस्क’ मौजूद रहे, जहाँ परिजन जरूरत पड़ने पर सीधे मदद ले सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवा की साख और दक्षता में बड़ा सुधार होगा। इससे न केवल मरीजों को समय पर सहायता मिलेगी बल्कि निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाने दाम वसूलने की प्रवृत्ति पर भी लगाम लगेगी।
गुरुवार को पूरे जिले में ‘यात्री साथी’ ऐप के लॉन्च को लेकर उत्साह देखा गया। कई जगहों पर पोस्टर और जागरूकता अभियान भी चलाए गए ताकि आम जनता इस ऐप के इस्तेमाल की प्रक्रिया से परिचित हो सके।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि आने वाले महीनों में इस सेवा का विस्तार राज्य के सभी 23 जिलों में किया जाएगा, और हर जिले में कम से कम 100 अधिकृत एम्बुलेंसों को इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
‘यात्री साथी’ ऐप से जुड़ी यह पहल न केवल तकनीकी दृष्टि से एक बड़ा बदलाव है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि राज्य प्रशासन अब स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है — ताकि आपातकालीन समय में किसी की जान बिचौलियों के लालच का शिकार न बने।














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