आसनसोल : बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज है। इस माहौल में आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर तथा भाजपा प्रदेश कमेटी के सदस्य जितेंद्र तिवारी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए के पक्ष में आए जनादेश ने यह संकेत दे दिया है कि जनता अब विकास, सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन को प्राथमिकता देने लगी है। तिवारी के अनुसार, यही राजनीतिक प्रवृत्ति वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिलेगी।
तिवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि बिहार चुनाव परिणाम महज एक राजनीतिक विजय नहीं, बल्कि जनता की मनोस्थिति में आ रहे बदलाव का संकेत है। उनका कहना था कि बिहार में एनडीए की सफलता के पीछे दो बड़े कारण प्रमुख रहे—पहला, कानून-व्यवस्था को लेकर कठोर कदम और दूसरा, एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से फर्जी नामों का हटाया जाना। उनके अनुसार, जब वोटर लिस्ट से मृतकों, घुसपैठियों और नकली मतदाताओं के नाम हटाए गए, तब वास्तविक और जागरूक मतदाताओं की शक्ति उभरकर सामने आई, जिसका सीधा लाभ एनडीए को मिला।

भाजपा नेता ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भी इसी प्रकार की एसआईआर प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत हजारों संदिग्ध और गैर-मान्य नामों की जांच हो रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यहां भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग पाए जा सकते हैं जो या तो काफी समय पहले दिवंगत हो चुके हैं या अवैध तरीके से मतदाता सूची में शामिल हुए थे। उनके अनुसार, “जब मतदाता सूची शुद्ध होगी, तब असल जनादेश सामने आएगा और राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।”
तिवारी ने आगे कहा कि बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार, घोटालों, शिक्षा भर्ती विवादों, कटमनी और हिंसा ने लोगों के मन में गहरा असंतोष पैदा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इन गंभीर मुद्दों पर ईमानदार रुख नहीं अपना पा रही है। उनका कहना था कि जनता का धैर्य अब टूटने लगा है और लोग एक ऐसे विकल्प की तलाश में हैं जो उन्हें सुरक्षित, पारदर्शी और स्थिर शासन दे सके।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राज्य इकाई संगठनात्मक रूप से मजबूत हो रही है, और जमीनी स्तर पर पार्टी का विस्तार लगातार बढ़ रहा है। तिवारी ने विश्वास जताया कि आने वाले महीनों में यह विस्तार और तेज़ी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि बंगाल में राजनीतिक परिदृश्य बिल्कुल उसी दिशा में बढ़ रहा है, जिस दिशा में बिहार में चुनाव से पहले दिखाई दिया था। जनता अब रोजगार, शिक्षा, सुरक्षा और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन जैसी मूलभूत अपेक्षाओं पर निर्णय लेने लगी है।

तिवारी ने दृढ़ स्वर में कहा, “बंगाल में 2026 का चुनाव परिवर्तन का वर्ष होगा। लोग तृणमूल कांग्रेस की नीतियों से ऊबे हुए हैं और इस बार का चुनाव ऐतिहासिक बदलाव लेकर आएगा। बिहार ने जो रास्ता दिखाया है, वही मार्ग बंगाल भी अपनाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात करें, न कि भावनाओं और वादों के सहारे राजनीति करें। तिवारी के अनुसार, यदि मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाने की प्रक्रिया ईमानदारी से पूरी हो गई, तो पश्चिम बंगाल में भी वास्तविक जनादेश सामने आएगा, जो राज्य की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है।
तिवारी के इस बयान ने स्थानीय राजनीतिक वातावरण में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में एसआईआर प्रक्रिया किस मुकाम पर पहुंचती है और इससे बंगाल की चुनावी राजनीति को कितना प्रभाव पड़ता है।














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