आसनसोल : रविवार को राजनीतिक हलकों में उस समय अप्रत्याशित सरगर्मी फैल गई, जब आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहार में एनडीए की हालिया विजय के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खुलकर सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट साझा किया। यह पोस्ट सामने आते ही पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के भीतर न केवल चर्चा तेज हो गई, बल्कि कई नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से ‘असामान्य संकेत’ के रूप में देखना शुरू कर दिया।

रविवार को आमतौर पर शांत रहने वाले राजनीतिक माहौल में यह पोस्ट अचानक बहस का विषय बन गया। शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा कि बिहार के मतदाताओं ने जिस विवेकपूर्ण निर्णय का प्रदर्शन किया है, वह राज्य के विकास और स्थिरता के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने नीतीश कुमार को ‘विकासोन्मुख, अनुभवी और भरोसेमंद’ बताते हुए कहा कि बिहार को फिर से एक सक्षम नेतृत्व प्राप्त हुआ है, जो संतुलित राजनीति और संयमित प्रशासन के लिए जाना जाता है।
सांसद सिन्हा ने आगे लिखा कि बिहार की जनता ने ‘स्थिर नेतृत्व’ को फिर से मौका देकर यह साबित कर दिया है कि सूझबूझ और अनुभव हमेशा प्रभावी साबित होते हैं। उन्होंने नीतीश कुमार को दीर्घकालिक प्रशासन, बेदाग छवि और शांत स्वभाव वाला नेता बताते हुए कहा कि वे बिहार को अनेक सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निकालने में सफल रहे हैं। अपने संदेश के अंत में उन्होंने “जय बिहार, जय हिंद” लिखकर अपनी बात समाप्त की।

इस पोस्ट का राजनीतिक प्रभाव पश्चिम बंगाल के भीतर तुरंत महसूस किया गया। टीएमसी के कई कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को यह प्रश्न परेशान करने लगा कि एक सत्ताधारी पार्टी का सांसद विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेता की इतनी खुली प्रशंसा आखिर किस संकेत की ओर इशारा करती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बिहार में नीतीश कुमार बीजेपी के सहयोगी हैं, जबकि बंगाल में बीजेपी टीएमसी की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी है। ऐसे में तृणमूल नेताओं के भीतर असहजता का माहौल बनना स्वाभाविक था।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस समय बंगाल की राजनीति में टीएमसी और बीजेपी के बीच निरंतर तीखी बयानबाजी चल रही है, उसी समय शत्रुघ्न सिन्हा का ऐसा सार्वजनिक प्रशस्ति संदेश पार्टी नेतृत्व को हैरान कर सकता है। विशेष रूप से इसलिए कि कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में शत्रुघ्न सिन्हा को प्रतिष्ठित ‘बंगभूषण’ सम्मान से सम्मानित किया था। ऐसे सम्मान के तुरंत बाद सांसद द्वारा विपक्षी सहयोगी दल के नेता की तारीफ करना राजनीतिक दृष्टि से असामान्य माना जा रहा है।
टीएमसी के कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में यह स्वीकार किया कि यह पोस्ट पार्टी के भीतर अचानक असहजता पैदा कर गया है। कुछ ने इसे व्यक्तिगत विचार बताते हुए तूल नहीं देने की सलाह दी, जबकि कुछ का मानना है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस पर स्पष्ट रुख अपनाएगा। फिलहाल सभी की निगाहें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी इसे ‘व्यक्तिगत अभिव्यक्ति’ मानकर आगे बढ़ जाएगी या फिर सांसद से स्पष्टीकरण की माँग की जाएगी।

रविवार को शहर और जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र यही रहा कि क्या शत्रुघ्न सिन्हा का यह पोस्ट सिर्फ राजनीतिक शिष्टाचार है, या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है। बिहार और बंगाल दोनों राज्यों की राजनीति इन दिनों लगातार बदलते समीकरणों से गुजर रही है। ऐसे में किसी नेता का सोशल मीडिया पर दिया गया छोटा-सा वक्तव्य भी बड़े राजनीतिक संकेतों का रूप ले लेता है।
फिलहाल, टीएमसी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में यह स्पष्ट दिख रहा है कि वे इस घटना को हल्के में नहीं ले रहे हैं। राजनीतिक स्वयंसेवी समूहों ने भी इसे सोशल मीडिया पर सक्रिय बहस का मुद्दा बना दिया है। कई लोग यह भी कह रहे हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर चर्चा निश्चित है।
रविवार का यह राजनीतिक घटनाक्रम न केवल आसनसोल बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में दिन भर चर्चा में बना रहा। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी नेतृत्व इस अप्रत्याशित स्थिति से कैसे निपटता है और क्या शत्रुघ्न सिन्हा इस पोस्ट को लेकर आधिकारिक बयान जारी करते हैं या नहीं।














Users Today : 3
Users Yesterday : 30