आसनसोल : शुक्रवार को शहर ने एक ऐसा असाधारण मानवीय उदाहरण देखा, जिसने सामाजिक सौहार्द और परोपकार की नई मिसाल पेश कर दी। पुलिस लाइन क्षेत्र में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान स्थानीय निवासी गुरविंदर सिंह चौधरी ने अपने परिवार की लगभग 70 कट्ठे में फैली पुश्तैनी जमीन आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारा समिति को समर्पित करने की घोषणा की। यह भूमि चौधरी परिवार के पास लगभग एक सदी से भी अधिक समय से थी, लेकिन समाज और धर्म के प्रति सेवा भाव रखते हुए गुरविंदर सिंह ने इसे गुरुद्वारे की सेवा में अर्पित कर दिया।

शुक्रवार दोपहर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी बड़े भावुक दिखाई दिए। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अमरजीत सिंह भरारा, अन्य पदाधिकारी और स्थानीय गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। अमरजीत सिंह भरारा ने बताया कि इस स्तर का दान आसनसोल के इतिहास में पहली बार हो रहा है और यह घटना शहर के सामाजिक परिदृश्य को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में पैतृक संपत्ति को लेकर अक्सर विवाद और विभाजन देखने को मिलते हैं, ऐसे समय में गुरविंदर सिंह चौधरी का यह साहसिक कदम अनुकरणीय है।
गुरविंदर सिंह ने कहा कि यह भूमि उनके पूर्वजों की मेहनत और परिश्रम का प्रतीक है, और उसी धरोहर को समाज के कल्याण के लिए उपयोग होते देखना उन्हें गर्व से भर देता है। उन्होंने बताया कि परिवार के सभी सदस्यों की सहमति से यह निर्णय लिया गया, ताकि भविष्य में इस भूमि का उपयोग सामुदायिक कार्यों, जनसेवा एवं धार्मिक गतिविधियों में हो सके। उनका कहना था कि “सेवा ही सच्ची श्रद्धा है, और यदि हमारी विरासत किसी के काम आ सके तो इससे बड़ा सौभाग्य कुछ नहीं।”

समिति के सदस्यों ने बताया कि इस विशाल भूमि के मिलने के बाद गुरुद्वारे की ओर से कई सामाजिक योजनाएँ शुरू की जा सकती हैं। इनमें एक स्वास्थ्य केंद्र, सराय भवन, वृद्धजन सहायता केंद्र तथा शिक्षा से संबंधित प्रकल्प शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गुरुद्वारा परिसर में जनकल्याण से जुड़े अनेक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिन्हें इस भूमि के माध्यम से विस्तार मिल सकेगा।
स्थानीय नागरिकों ने भी गुरविंदर सिंह के निर्णय की सराहना की। कई लोगों ने इसे आसनसोल के सामाजिक इतिहास का “अभूतपूर्व अध्याय” बताया। नगर के बुजुर्गों ने कहा कि आज के दौर में जब लोग छोटी-सी जमीन को लेकर भी संघर्ष करते हैं, वहीं इतनी विशाल संपत्ति का दान देना समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा भाव को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा समिति द्वारा गुरविंदर सिंह को सम्मान चिह्न भेंट किया गया तथा उनकी उदारता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। समारोह में उपस्थित लोगों ने खड़े होकर तालियाँ बजाकर उनका अभिनंदन किया। कई सदस्यों की आंखें नम हो गईं, क्योंकि यह दृश्य सचमुच शहर के लिए गौरवपूर्ण था।

गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष ने कहा कि यह दान केवल आर्थिक महत्व का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानवीय दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान है। इससे भावी पीढ़ियाँ प्रेरणा लेंगी कि समाज के लिए किया गया कार्य ही किसी भी संपत्ति का सबसे बड़ा उपयोग है। उन्होंने कहा कि भूमि का विकास पूरी पारदर्शिता और सामुदायिक चर्चा के साथ होगा, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके।
कार्यक्रम के बाद स्थल पर पहुंचे नागरिकों ने इस निर्णय के प्रति अपना समर्थन और खुशी व्यक्त की। कई लोगों ने कहा कि शुक्रवार का यह दिन आसनसोल के इतिहास में विशेष रूप से याद रखा जाएगा, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर समाजसेवा की भावना का परिचय मिलना दुर्लभ है।
गुरविंदर सिंह का यह निर्णय न केवल आसनसोल बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। उनकी यह पहल आने वाली पीढ़ियों को भी सेवा, सहयोग और त्याग की भावना के लिए प्रेरित करेगी। शहर में उनके इस अद्वितीय कार्य की चर्चा पूरे दिन होती रही और लोगों ने इसे “शुक्रवार का स्वर्णिम संकल्प” बताया।














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