कोलकाता : बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब अपना पूरा ध्यान वर्ष 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर केंद्रित कर दिया है। रविवार को भी प्रदेश स्तर पर चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने को लेकर मंथन जारी रहा। पार्टी नेताओं ने संकेत दिया कि दिसंबर माह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बंगाल दौरे को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

राज्य BJP कार्यालय में दो दिनों से लगातार हो रही बैठकों में प्रदेश नेतृत्व, संगठन के पदाधिकारी तथा चुनाव प्रबंधन टीम शामिल रही। बैठक के दौरान बूथ स्तर की तैयारियों, सभाओं, प्रचार-प्रसार और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस बार चुनावी अभियान को “अभूतपूर्व और पूरी तरह जमीनी” बनाने की दिशा में काम कर रही है।
राज्य नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया कि 13 और 14 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बंगाल आ सकते हैं। पार्टी इन तिथियों को लेकर विशेष तैयारियों में जुट गई है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी शेष है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री संभवतः आरामबाग क्षेत्र में एक बड़ी जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। स्थानीय इकाइयों को भीड़ प्रबंधन, रूट प्लानिंग और प्रचार सामग्री को लेकर निर्देश दिए जा चुके हैं।

इसके अतिरिक्त, वर्ष के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी पश्चिम बंगाल आगमन की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि अमित शाह का दौरा संगठन को मजबूत करने और चुनावी समीकरणों को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाएगा। दोनों शीर्ष नेताओं के संभावित दौरे को बंगाल में “चुनावी अभियान के निर्णायक पड़ाव” के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी प्रदेश नेतृत्व इस बार “परिवर्तन यात्रा” की नई श्रृंखला शुरू करने की योजना बना रहा है। बैठक में इस प्रस्ताव पर भी गंभीर चर्चा हुई कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राज्यभर में पाँच परिवर्तन यात्राएँ शुरू की जाएँ, जो विभिन्न जिलों को जोड़ते हुए व्यापक जनसंपर्क अभियान का रूप लेंगी।

पार्टी नेताओं का मानना है कि बिहार में मिली जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और इसकी लय को बंगाल में भी बनाए रखना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार परिणामों के बाद कहा था कि “विजय का यह कारवां अब बंगाल की ओर बढ़ेगा”—और पार्टी इस संदेश को चुनावी ऊर्जा में बदलने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दो महीनों में भाजपा का पूरा फोकस बंगाल पर रहेगा और शीर्ष नेतृत्व के दौरे चुनावी माहौल को गर्माएंगे। दूसरी ओर, TMC भी अपनी रणनीति मजबूत कर रही है, जिससे मुकाबला और अधिक रोचक होने की संभावना है।
रविवार को जारी बीजेपी की बैठकों से यह स्पष्ट है कि पार्टी 2026 के चुनाव को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लेना चाहती। पूरी मशीनरी सक्रिय कर दी गई है और शीर्ष नेतृत्व की संभावित आमद इसे और गति प्रदान करेगी।














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