आसनसोल : सोमवार को आसनसोल के रानीगंज क्षेत्र में बंगाल केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की रानीगंज शाखा की ओर से नकली दवाओं के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु एक विस्तृत जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था द्वारा निकाली गई रैली एवं आयोजित स्ट्रीट कॉर्नर में न केवल आम नागरिकों की भागीदारी देखी गई बल्कि दवा विक्रेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक उपस्थिति दर्ज की। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नकली दवाओं की पहचान, उनके दुष्परिणाम और सतर्क रहने के उपायों से अवगत कराना था।

रैली की शुरुआत रानीगंज स्थित संस्था के कार्यालय के बाहर से हुई। इसके बाद यह जुलूस सरकारी बैंक के समीप होते हुए तार बांग्ला मोड़, दाल पट्टी मोड़ और इतवारी मोड़ से गुजरता हुआ नेताजी प्रतिमा स्थल के समीप समाप्त हुआ। मार्ग भर प्रतिभागियों ने नकली दवाओं के खिलाफ नारे लगाए और लोगों को सावधानी बरतने का संदेश दिया। रैली के समापन के पश्चात नेताजी प्रतिमा के निकट एक स्ट्रीट कॉर्नर आयोजित किया गया, जहां संगठन के विभिन्न वक्ताओं ने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।

संगठन के रानीगंज शाखा के सचिव तिमिर बरण मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि नकली दवाओं का बाजार न केवल रोगियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, बल्कि यह समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में नकली दवाओं के मामले तेजी से बढ़े हैं और इससे बचने का सबसे बड़ा उपाय है—जागरूकता। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि दवा खरीदने से पूर्व हमेशा क्यूआर कोड के माध्यम से दवा की सत्यता की जांच करें तथा दवा खरीदते समय कैश मेमो अवश्य लें। उनका कहना था कि जब लोग स्वयं सतर्क रहेंगे, तब ही दवा विक्रेताओं पर अनुशासन स्थापित हो सकेगा।
संगठन के अध्यक्ष महेश कुमार सर्राफ ने भी नकली दवाओं की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि उनके संगठन ने कई वर्षों से इस विषय पर अभियान चलाया हुआ है। पहले जहाँ बंगाल में नकली दवाओं का प्रभाव सीमित था, वहीं अब यह अवैध कारोबार धीरे-धीरे फैलता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल चिंताजनक है बल्कि जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी भी है। उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से लगातार जन-जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएँ और व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति में लोग भ्रमित न हों।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नकली दवाओं की पहचान करना मुश्किल अवश्य है, परंतु असंभव नहीं। यदि व्यक्ति क्यूआर कोड जांच, पैकिंग की गुणवत्ता, बैच नंबर, निर्माता संस्था और एक्सपायरी तिथि की सावधानीपूर्वक जाँच करे तो जोखिम बहुत हद तक कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि दवाओं की खरीद तथाकथित सस्ती दुकानों या संदिग्ध विक्रेताओं से न की जाए, क्योंकि ऐसी जगहों पर नकली उत्पादों की आशंका अधिक रहती है।
संगठन ने यह भी बताया कि केवल नकली दवाओं के खिलाफ संघर्ष ही उनका उद्देश्य नहीं है। वे विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी समान रूप से सक्रिय रहते हैं। रक्तदान शिविरों का आयोजन, ज़रूरतमंद रोगियों को निःशुल्क दवाओं का वितरण, और दुर्लभ रोगों से पीड़ित लोगों की सहायता संगठन की विशेष गतिविधियों में शामिल हैं। महेश सर्राफ ने कहा कि सामाजिक उत्तरदायित्व संगठन की मूल भावना है और यह अभियान भी उसी का विस्तार है।
स्ट्रीट कॉर्नर कार्यक्रम के दौरान कई नागरिकों ने अपने अनुभव साझा किए और नकली दवाओं के चलते हुए नुकसान के उदाहरण भी दिए। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में रोग और दवाएँ दोनों ही जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं, इसलिए दवा की असलियत पर संदेह होने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।

सोमवार के इस जागरूकता कार्यक्रम ने यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया कि नकली दवाओं के खिलाफ लड़ाई केवल संगठन की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। यदि लोग सतर्क रहें, सत्यापित दवाएँ खरीदें और अनियमितताओं की सूचना संबंधित विभाग को दें, तो इस चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
रानीगंज में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल सफल रहा, बल्कि इससे नागरिकों में सतर्कता और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ी। संगठन ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और गति दी जाएगी तथा पूरे बंगाल में जागरूकता रैलियाँ जारी रहेंगी, ताकि हर नागरिक सुरक्षित औषधि का अधिकार प्राप्त कर सके।














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