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कोयला सिंडिकेट पर केंद्रीय एजेंसियों की कड़ी निगरानी तेज हुई

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कोलकाता/आसनसोल :  बुधवार को कोयला तस्करी से जुड़े कुख्यात नेटवर्क पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यवाही और तेज होती दिखाई दी। बीते सप्ताह चली ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन कारोबारियों और संबंधित लोगों के यहां तलाशी ली गई थी, उन सभी को बुधवार को कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। कई लोग सुबह से ही ईडी दफ्तर पहुंचने लगे थे। जांच सूत्रों का कहना है कि यदि बयानों में विसंगति मिली, तो गिरफ्तारी भी संभव है।

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केंद्रीय गृह और वित्त मंत्रालय से मिली खुली छूट

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने ईडी को इस मामले में “निर्बाध कार्रवाई” की अनुमति दे दी है। इसके बाद से एजेंसी की टीम कोयला सिंडिकेट के मुख्य पात्रों—कृष्ण मुरारी कयाल उर्फ केके और लाल बहादुर सिंह उर्फ एलबी—के नेटवर्क की परतें उधेड़ने में और सक्रिय हो गई है। जांचकर्ताओं का दावा है कि अफसरों, कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों का गठजोड़ पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है।

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ईडी ने CVC को भेजा संक्षिप्त नोट

ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद ईडी ने अपनी आंतरिक रिपोर्ट केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को सौंप दी है। इसमें बताया गया है कि किस तरह अवैध खनन से लेकर तस्करी और बिक्री तक का पूरा सिलसिला एक संगठित रूप में संचालित हो रहा था। सीवीसी को भेजे गए नोट में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर टिप्पणियाँ की गई हैं।

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21–22 नवंबर को 44 स्थानों पर चली थी बड़ी कार्रवाई

ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 17 के तहत पश्चिम बंगाल और झारखंड में कुल 44 जगहों पर समन्वित सर्च ऑपरेशन चलाया था। दो दिनों में लगभग 14 करोड़ रुपये की नकदी, सोना और अन्य महंगी सामग्री बरामद की गई। कई संपत्तियों के दस्तावेज, जमीन खरीद-बिक्री के एग्रीमेंट और डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनसे इस सिंडिकेट के विस्तार का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

बंगाल में दुर्गापुर, पुरुलिया, हावड़ा और कोलकाता में स्थित घरों, कार्यालयों और अवैध टोल बूथों पर तलाशी ली गई, जबकि झारखंड में धनबाद और दुमका क्षेत्र में बिजनेस नेटवर्क की परतें खोली गईं। ईडी के सौ से अधिक अधिकारी और सीआरपीएफ जवान इस ऑपरेशन में शामिल थे।

सिंडिकेट में बढ़ी बेचैनी, कई लोग हुए भूमिगत

पूछताछ की प्रक्रिया शुरू होते ही पूरे सिंडिकेट में दहशत फैल गई है। कुछ सदस्य भूमिगत हो गए हैं, जबकि कई लोगों ने अपने वकीलों की टीम सक्रिय कर दी है। ईडी का कहना है कि सभी संदिग्धों को समन भेजा गया है, और जो उपस्थित नहीं होंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत अगली कार्रवाई तय है। जिनके रिश्ते परोक्ष रूप से जुड़े मिले हैं, उन्हें भी ई-मेल के माध्यम से जवाब देने के लिए कहा गया है।

उधर, जांच से बचने के लिए सिंडिकेट की ओर से यह अफवाह फैलाई जा रही है कि “एक सप्ताह में सब सेट हो जाएगा।” एजेंसी को इस दुष्प्रचार की भी जानकारी मिल चुकी है और इसके खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया जा रहा है।

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अवैध टोल बूथ और धमकियों का सिलसिला फिर शुरू

छापेमारी के दो दिन बाद स्थिति सामान्य दिख रही थी, लेकिन अब दोनों राज्यों में सक्रिय नेटवर्क फिर से हरकत में आने लगा है। झारखंड की ओर एलबी के लोगों ने मोर्चा संभाल लिया है, जबकि बंगाल की ओर केके के करीबी सहयोगी फिर से सक्रिय हैं। डीओ धारकों और वाहन मालिकों को धमकाया जा रहा है कि ‘रंगदारी’ नहीं देने पर लोडिंग बंद कर दी जाएगी। निरसा से लेकर दुर्गापुर तक कई जगह गुप्त टोल बूथ दोबारा खड़े किए जाने की बात सामने आई है।

CVC ने ECL को दिया निर्देश—कठोर जांच शुरू

ईडी की रिपोर्ट मिलने के बाद CVC ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की मुख्य सतर्कता अधिकारी दीप्ति पटेल को सख्त निर्देश दिए हैं। ईसीएल के जिन अफसरों पर संदेह है, उनकी भूमिका की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। कोलियरी, ओसीपी (ओपन कास्ट प्रोजेक्ट) और डिपो में तैनात कर्मचारियों—सुरक्षा कर्मियों से लेकर सेल्स मैनेजर तक—की जिम्मेदारियों की जांच की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर कोयला चोरी बिना मिलीभगत के संभव ही नहीं थी। इसीलिए अब विभागीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे सीवीसी को सौंपा जाएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी कसौटी पर

ईडी ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराया है। बताया जाता है कि अब स्थानीय प्रशासन भी अपनी ओर से कार्रवाई के लिए तैयार है। विभागीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और आने वाले दिनों में मैदान स्तर पर और कदम उठाए जा सकते हैं।

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