आसनसोल : बुधवार को विवाह पंचमी के उपलक्ष्य में पूरे शहर के मंदिरों में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। राम–सीता के दिव्य विवाह की स्मृति में अलग-अलग समितियों द्वारा विशेष पूजा, भजन-सांध्याओं और पारंपरिक रस्मों का आयोजन किया गया। सुबह से ही प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। जगह-जगह वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भजन-कीर्तन से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक रंग में रंग गया।

शहर के कई मंदिरों में सजावट का विशेष ध्यान रखा गया। हल्की ठंड के बीच रंग-बिरंगी रोशनियों, ताज़े फूलों और पारंपरिक शुभ प्रतीकों से सजे मंदिर परिसर आकर्षण का केंद्र बने रहे। श्रद्धालुओं ने राम-सीता के दिव्य मिलन की कथा को स्मरण करते हुए परिवार सहित पूजा-अर्चना की और अपने घर-परिवार की समृद्धि एवं शांति की कामना की।

बुधवार को सबसे बड़े आयोजनों में से एक जीटी रोड क्षेत्र के एक प्रमुख मंदिर में आयोजित विवाह समारोह रहा, जहां स्थानीय धार्मिक समिति ने परंपरा के अनुरूप ‘विवाह-लीला’ का आयोजन किया। पंडितों द्वारा विधिवत पूजन, मंगल गीत, कलश-स्थापना और प्रतिमाओं का विशेष अभिषेक किया गया। प्रतिमाओं को नए परिधान, मुकुट और पुष्पमालाओं से सजाकर विवाह सूत्र में बांधा गया।

विशेष रूप से महिलाओं में उत्साह देखने लायक था। सुहागिनों ने पारंपरिक रीति के अनुसार सिंदूरदान की रस्म निभाई और एक-दूसरे के मंगल-सौभाग्य की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में गूंजते विवाह गीतों और भजनों ने पूरे माहौल को और अधिक पावन बना दिया।
इस अवसर पर कई यजमान परिवारों ने संपूर्ण पूजा की जिम्मेदारी संभाली और सभी रस्मों में भाग लिया। श्रद्धालुओं को भजन-कीर्तन के बाद प्रसाद और भंडारे का वितरण भी किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि विवाह पंचमी पर राम-सीता विवाह का आयोजन शहर में पारिवारिक, सामाजिक और धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बन चुका है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी व्यापक उपस्थिति रही। नगर निगम तथा विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में शामिल होकर मंगलकामनाएँ दीं। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक उत्सव न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और सांस्कृतिक चेतना भी मजबूत करते हैं।
दिनभर चले इस उत्सव में भक्तों ने भक्ति-रस में डूबकर भगवान राम और माता सीता के दांपत्य जीवन की पावन कथा को याद किया और अपने जीवन में भी सद्भाव, आदर्श और मर्यादा बनाए रखने का संकल्प लिया। शहर में आयोजित सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुए।














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