आसनसोल : रोमांच और साहस के अद्भुत संगम के रूप में नेशनल एडवेंचर्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित साइकिल अभियान का समापन शुक्रवार को हुआ। लगभग डेढ़ माह तक चले इस अभियान में हिस्सा लेने वाले प्रशिक्षक और दस प्रतिभागी बच्चे सुरक्षित आसनसोल लौटे, जिसके बाद स्थानीय क्षेत्र में उत्साह और गर्व का वातावरण देखा गया।

शक्ति साइकिल अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को बर्नपुर स्थित गुरुद्वारे से की गई थी। इस ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व नेशनल एडवेंचर्स फाउंडेशन, पश्चिम बंगाल पश्चिम के निदेशक मिहिर कुमार मंडल ने किया। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने कठिन मौसम, ऊँचाई और दुर्गम मार्गों को पार करते हुए 18,000 फीट की ऊँचाई पर साइकिलिंग की, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।
प्रतिभागियों ने लगभग माइनस 28 डिग्री सेल्सियस तापमान में साइकिल चलाई और अपनी यात्रा के दौरान गलवान घाटी और पैंगोंग झील जैसे अत्यंत संवेदनशील और ऊँचे भूभाग तक सफलतापूर्वक पहुँचे। यह वही क्षेत्र है, जहां सामान्य परिस्थितियों में भी मानव गतिविधियां सीमित रहती हैं।

अभियान के दौरान भारतीय सेना द्वारा सुरक्षा, मार्गदर्शन और आवश्यक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। श्री मंडल के अनुसार सेना के इस सहयोग के बिना इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर पाना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि सेना के जवानों ने बच्चों की हिम्मत बढ़ाई और हर जटिल परिस्थिति में उनका मनोबल बनाए रखा।
इस अभियान को न केवल रोमांचक अनुभव माना जा रहा है, बल्कि इसे बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। अभियान में शामिल बच्चों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके जीवन का अविस्मरणीय अध्याय बन गई है और इससे उनमें आत्मविश्वास, सहनशीलता और देशभक्ति की भावना भी मजबूत हुई है।
सूत्रों के अनुसार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने के लिए औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही निकट भविष्य में अभियान दल को भारत के राष्ट्रपति श्रीमती/श्रीमान द्वारा सम्मानित किए जाने की संभावना भी व्यक्त की गई है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने बच्चों के साहस और नेतृत्वकर्ता मंडल की प्रशंसा की है। उनका मानना है कि इस अभियान ने पश्चिम बंगाल और विशेष रूप से आसनसोल का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

प्रतिभागियों के स्वागत के लिए जल्द ही नगर में एक सम्मान समारोह आयोजित किए जाने की भी संभावना जताई गई है, जिससे इन नन्हे साहसियों का उत्साह और मनोबल और अधिक बढ़ सके।
यह अभियान इस संदेश के साथ अपने गंतव्य तक पहुँचा कि दृढ़ संकल्प, उचित प्रशिक्षण और साहस से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।














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